बुलंद दरवाजे के रास्ते का रोड़ा बन गया ताज महल…

आगरा: भारत के दो विख्यात धरोहर ताजमहल और बुलंद दरवाजा इन दिनों एक-दूसरे के ही रास्ते का रोड़ा बनते नजर आ रहे हैं। दरअसल, पहले जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रसायन शाखा ताज और बुलंद दरवाजा दोनों धरोहरों पर मडपैक ट्रीटमेंट का काम करने की कवायद में जुटा था। वहीं अब ताज का काम पहले किया जाएगा उसके बाद ही बुलंद दरवाजे का नंबर आएगा। ताज पर मडपैक ट्रीटमेंट का काम शुरू किया जा चुका है।

बुलंद दरवाजे

बुलंद दरवाजे का नंबर ताज के बाद में

मिली जानकारी के अनुसार, इन दिनों एएसआई की रसायन शाखा इन दिनों ताज महल की सतह पर मडपैक ट्रीटमेंट कर उसे चमकाने में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह काम वर्ष 2018 तक चलेगा। यहां का काम ख़त्म होने के बाद फतेहपुर सीकरी में स्थित बुलंद दरवाजे की साफ़ सफाई का काम शुरू होगा।

एएसआई के एक सूत्र ने विभाग के अधिकारी के हवाले से बताया कि बुलंद दरवाजे की सफाई व उसके पत्थरों के संरक्षण की भी योजना तैयार की थी। दरवाजे की दीवारों पर लगे मधुमक्खियों के छत्ते हटाने के साथ, उनके दाग व पत्थरों पर जमी गंदगी को साफ करने के लिए केमिकल ट्रीटमेंट किया जाएगा। खराब होते पत्थरों के संरक्षण को उन पर केमिकल का लेप और दरवाजे की पच्चीकारी की सफाई भी की जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि ताज के गुंबद के समान बुलंद दरवाजा की सफाई व संरक्षण का काम भी आसान नहीं होगा। यह दरवाजा करीब 176 फुट ऊंचा है। इतनी ऊंचाई पर काम करने के लिए यहां बांधी जाने वाली पाड़ के ऊपर हवा के दवाब के चलते मुश्किलें आएंगी। दरवाजे से होकर शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर जाने वाले लोगों के लिए भी व्यवस्था करनी होगी।

 

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