यहां तो जनवरी में सदियों से बुढ्ढा होता है मंगलवार

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गोररखपुर आपने आदमी या औरत के बूढ़े होने के बारे में अक्सर सुना होगा। यहां तक कि सामानों पर भी लोग कभी-कभी टिप्पणी कर देते हैं कि अब यह बुढ्ढा हो गया है। लेकिन ऐसा बहुत कम सुनने को मिला होगा कि कोई खास दिन बुढ्ढा हो जाए। लेकिन यूपी के गोरखपुर में ऐसा होता है। यहां हर साल जनवरी में एक मंगलवार बुढ्ढा हो जाता है जिसे स्थानीय भाषा में बुढ़वा मंगल कहते हैं। वैसे कहने को यह सिर्फ बुढ़वा मंगल है, लेकिन इसका सदियों से खासा महत्व है।

बुढ़वा मंगल को चढ़ने वाली खिचड़ी का महत्व ज्यादा है

गोरखपुर शहर के गोरखनाथ मंदिर में हजारों वर्षों से मकर संक्रांति के दिन खिचढ़ी चढ़ाने की परम्परा रही है। इस दिन देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों लोग खिचड़ी चढ़ाते हैं। नेपाल से भी हजारों की संख्या में खिचड़ी चढ़ाने के लिये लोग गोरखपुर आते हैं। गोरखनाख बाबा को खिचड़ी मकर संक्रांति के बाद एक महीने तक चढ़ती है। लेकिन इस दरम्यान बुढ़वा मंगल को चढ़ने वाली खिचड़ी का महत्व ज्यादा है। यूं कहें कि मकर संक्रांति के दिन के बाद अगर किसी खिचड़ी का महत्व है तो वह बुढ़वा मंगल का ही है।

कोई किवदंती नहीं

बुढ़वा मंगल के महत्व को लेकर कोई किवदंती या लोककथा स्थानीय स्तर पर प्रचलित नहीं है। बहुत कम लोग मंगलवार के बूढ़े होने का रहस्य जानते हैं। जो लोग इस बारे में जानकारी रखते हैं, वे इस बात की गारंटी नहीं दे सकते कि उनका बताया कारण ही सही है।

इसलिये कहते हैं बुढ़वा मंगल

गोरखनाथ मंदिर के करीबी और पेशे से डिग्री कालेज के शिक्षक डा.श्रीभगवान सिंह ने इस शब्द पर काम किया है। वह बताते हैं कि बुढ़वा मंगल मकर संक्रांति के बाद पड़ने वाले मंगलवार के बाद का दूसरा मंगलवार होता है। यूं तो खिचड़ी मेला एक महीने तक चलता है लेकिन ज्यादातर भीड़ पंद्रह दिनों के भीतर खिचड़ी चढ़ा चुकी होती है। बुढ़वा मंगल तक लगभग पंद्रह दिन का समय पूरा हो चुका होता है। ऐसे में इस मंगलवार से इस ऐतिहासिक मेले के अवसान का समय माना जाता है लिहाजा इसे बुढ़वा मंगल कहते हैं।

होती है घोषणा

जिस प्रकार मकर संक्राति की तिथि की घोषणा गोरखनाथ मंदिर प्रशासन करता है, उसी प्रकार बुढ़वा मंगल की तारीख भी पहले से घोषित होती है.इस दिन मंदिर में भारी भीड़ होती है और लोग बाबा को जयकारों के साथ खिचड़ी चढ़ाते हैं। इस बार यह गजब संयोग रहा कि बुढ़वा मंगल और गणतंत्र दिवस एक ही दिन पड़ा।

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