ये खबर पढ़कर भीख देना बंद कर देंगे आप…

बेंगलुरु । बेंगलुरु के भिखारी हजारों में खेल रहे हैं। खबर आपको हैरान कर सकती है लेकिन सच यही है। भारत में सिलिकॉन वैली के नाम से मशहूर बेंगलुरु में भिखारी चांदी काट रहे हैं।

बेंगलुरु के भिखारी

बेंगलुरु के भिखारी BA,MA और डिप्लोमा होल्डर

आपको ये जानकार और भी हैरानी होनी चाहिए कि इन भिखारियों में कई तो ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और डिप्लोमा होल्डर तक हैं। इन भिखारियों की जब गिनती की गई तो आंकड़े चौंकाने वाले आए। कुल मिलाकर 169 भिखारी ऐसे हैं जो अच्छे खासे पढ़े-लिखे हैं, लेकिन फिर भी भीख मांगकर अपना घर चला रहे हैं। इन 169 भिखारियों में 68 महिलाएं भी ऐसी हैं जो पढ़ी लिखी हैं और अपने मर्दों की तरह इन्होंने भी ग्रैजुएशन और पोस्टग्रैजुएशन किया हुआ है।

2011 की जनगणना के मुताबिक कर्नाटक में 10,682 भिखारी हैं। इनमें सबसे ज्यादा 1368 लोग राजधानी बेंगलुरु में भीख मांग रहे हैं। राज्य सरकार के पास जब ये आंकड़े पहुंचे तो सरकार ने पढ़े-लिखे भिखारियों को मुख्यधारा में शामिल करने की कोशिश की। सरकार की कोशिशें उस वक्त धरी की धरी रह गई जब सभी ने एक सुर से सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

राज्य सरकार का प्रस्ताव लेकर गए अफसर उस बात से चौंक गए जब भिखरियों ने कहा कि वो भीख मांग कर ज्यादा पैसा कमा लेते हैं तो फिर वो भीख मांगना क्यों छोड़ दें। दिलचस्प है कि इन भिखारियों में कई भिखारी अभी जवान हैं और कोई सम्मानजनक काम भी कर सकते हैं। लेकिन सभी ने साफ तौर पर भीख मांगना बंद करने से इनकार कर दिया।

फैक्ट्री में पसीना बहाने वाले से ज्यादा कमाई

बेंगलुरु के इन पढ़े लिखे भिखारियों को एमजी रोड और दूसरे कॉमर्शियल इलाकों में भीख मांगते देखा जा सकता है। अपनी पारिवारिक हालात के हवाला देकर ये लोगों से भीख मांगते हैं। इनका कहना है कि हममें से कई तो हर महीने 12-15 हजार तक कमा लेते हैं जबकि फैक्ट्री में काम करने वाले 6-8 हजार तक ही कमा पाते हैं, फिर हम भीख मांगना क्यों छोड़े।

कर्नाटक में पढ़े-लिखे भिखारियों की प्रोफाइल भी बड़ी दिलचस्प है। 10 हजार में से ढाई हजार पढ़े लिखे हैं, तकरीबन 15 सौ हाई स्कूल पास हैं और साढ़े चार सौ के करीब इंटर पास हैं। 23 भिखारियों ने तो बाकायदा टेक्निकल एजूकेशन में डिप्लोमा हासिल किया हुआ है।

अब बात बेंगलुरु की भी कर लेते हैं। यहां के 77 भिखारी ग्रैजुएट और पोस्टग्रैजुएट हैं। 25 के पास टेक्निकल डिप्लोमा हैं और दो सौ से ज्यादा ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की हुई है।

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