IPL
IPL

बेटे के शव को कफन देने के लिए भटकती रही मां

इलाहाबाद। मुफलिसी इंसान को मजबूर कर देती है, इसका नमूना आज यहां देखने को मिला। जब बेटे की लाश देखकर विधवा मां चीत्कार कर उठी। गरीबी का आलम यह था कि कफन देने के लिए भी मां के आंचल में पैसे नही थे। वहां मौजूद हर आंख नम हो गयी।
बेटे
विधवा मां के इस इकलौते सहारे ने ने आग लगाकर जान देने की कोशिश की थी उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मदद के लिए अस्पताल परिसर के दुकानदार आगे आए तब पुत्र को मां के हाथों कफन नसीब हुआ।

बेटे को बर्दाश्त न हुई पिता की मौत व गरीबी

Premchand - Kafan 3

जिले के मोहब्बतपुर पैंइसा थाना क्षेत्र के बड़ी उदहिन  निवासी छेद्दू जिसकी उम्र महज 16 साल थी। पिता राजाराम की मौत दो माह पूर्व दवा के अभाव में हो गई।  वह  मां निर्मला देवी के गुजर बसर करने लगा, पिता के मौत के बाद सदमे में आ गया था। दिन रात पिता को याद कर रोता बिलखता रहता था।

मां निर्मला का कहना है कि बेटा हमेशा यही कहता था कि पैसे होते तो पापा बच जाते। परिवार में राजाराम के अलावा कोई कमाने वाला नहीं था।  पति की मौत के बाद  निर्मला के पास यही उम्मीद बची  कि पुत्र के साथ कैसे भी गुजर बसर कर लेंगे। माली मालत खराब होने की वजह से मां-बेटा भुखमरी के कगार पर पहुंच गए।  इस दुख को छेदू बर्दाश्त नही कर पाया और घर में खुद को अकेला पाकर मिट्टी का तेल छिडक़ आग लगा ली। हालांकि पड़ोसियों ने आग बुझायी जिला अस्पताल ले गए। लेकिन उपचार के दौरान ही छेदू की मौत हो गई। पति के मौत के बाद पुत्र से उम्मीद लगाई थी लेकिन यहां भी नाउम्मीदी हाथ लगी। किसी तरह से वह पुत्र की लाश लेकर गयी। लेकिन एक सवाल छोड़ गयी क्या यही है जिंदगी। मौत से बेहतर ?

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button