बैंक पहुंचे और बन गए अप्रैल फूल !

0

गोरखपुर। हांलाकि यह व्यवस्था तकरीबन आठ साल पुरानी है लेकिन हर साल बहुत सारे बैंक उपभोक्ता झटका खा जाते हैं। हम बात कर रहे हैं क्लोजिंग डे की। यानी वह दिन जब बैंक तो खुले होते हैं लेकिन ग्राहकों के काम नहीं होते। ऐसे में अगर ग्राहक पैसा जमा करने या पैसा निकालने जाता है तो उसका अप्रैल फूल बनना तय है। क्योंकि बैंकों का क्लोजिंग डे 31 मार्च नहीं रह गया है बल्कि यह तारीख 01 अप्रैल हो चुकी है। गोरखपुर में भी इस साल सैकड़ों ग्राहक अप्रैल फूल बने क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि 01 अप्रैल को उनके लिए नहीं खुलेंगे।

बैंक

भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारी अशोक का कहना है कि पहले 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के साथ क्लोजिंग होती थी। लिहाजा 31 मार्च को वित्तीय दबाव ज्यादा था। कथित विकास के नाम पर झटके से ढेरों ट्रांजेक्शन होते थे और यह बैंकों के लिए संभव न था। लिहाजा  31 मार्च की बजाय 01 अप्रैल को क्लोजिंग डे रखा। यह व्यवस्था 7-8 वर्षों से है लेकिन जानते वही हैं जिनकी रोजाना जरूरत बैंकों से पड़ती है। जो नहीं जानते उन्हें पहुंचकर ही पता चलता है कि 01 अप्रैल को बैंक ग्राहक के लिए बंद है।

बैंक करते हैं काम

01 अप्रैल ही वह तारीख है जब बैंक के कर्मचारी सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं। उन्हें 31 मार्च और 01 अप्रैल के बीच सारा काम निपटाना होता है। चूंकि क्लोजिंग के काम के लिए एकाग्रता की जरूरत होती है लिहाजा बैंक में ग्राहकों का प्रवेश गेट पर ही रोक दिया जाता है। इस दिन अमूमन बैंक के उन कर्मचारियों की मौज होती है जो साल के बाकी दिनों में सिर्फ ग्राहक सेवाओं से जुड़े रहते हैं।

परेशान हुए ग्राहक

01 अप्रैल की क्लोजिंग के कारण उन ग्राहकों को खासा परेशानी उठानी पड़ी जिन्हें लोन का किश्त या फिर क्रेडिट कार्ड का बिल जमा करना था। अगर किश्त या बिल की डेट एक अप्रैल है तो ऐसे ग्राहकों को लेट फाइन देना ही पड़ेगा। एक निजी बैंक के क्रेडिट कार्ड का बिल जमा करने पहुंचे राजकुमार ने बताया कि बैंकों को इस डेट के बारे में अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए। ग्राहकों को पहले से ही सूचना देनी चाहिए थी।

loading...
शेयर करें