मुस्लिम महिलाओं को फरमान… अंग्रेजी सीखो नहीं तो जाओ

लंदन। ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन का नया कदम मुसलमानों को नागवार गुजर सकता है। ब्रिटिश पीएम ने कहा है कि अगर यूके में रहना है तो मुस्लिम महिलाओं को अंग्रेजी आनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने एक टेस्ट कराने की भी बात कही है जिसमें पास होने के बाद ही उनको ग्रेट ब्रिटेन में रहने का अधिकार मिलेगा। पीएम कैमरन से साफ किया कि  ऐसा करने में नाकाम रहने वाली महिलाओं को वापस भेजा जा सकता है।

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ब्रिटिश पीएम की आतंकवाद के खिलाफ नई स्ट्रेटेजी

ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक कैमरन सरकार का यह कदम बढ़ते टेररिज्म से निपटने की नई स्ट्रेटेजी के तौर पर देखा जा रहा है। इस मौके पर ब्रिटिश पीएम कैमरन ने कहा, ‘स्पाउस सेटलमेंट प्रोग्राम को हम थोड़ा सख्त करने जा रहे हैं। यह उन मांओं पर भी लागू होगा, जो यहां आकर बसी हैं और उनके बच्चे हो चुके हैं। इस बात की गारंटी नहीं है कि इंग्लिश टेस्ट पास न कर पाने की स्थिति में ऐसी महिलाएं ब्रिटेन में रह पाएंगी या नहीं।’

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गौरतलब है कि, ब्रिटेन सरकार का कहना है कि यूके में रह रहीं 1,90,000 मुस्लिम महिलाओं में अंग्रेजी भाषा की स्किल्स की कमी है। इनमें से 38,000 महिलाएं अंग्रेजी बोल तक नहीं पातीं। ब्रिटिश सरकार की नई पॉलिसी के अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। अक्टूबर के बाद से पांच साल के स्पाउस वीसा पर यूएके आई महिलाओं के पास इस परीक्षा को पास करने के लिए ढाई साल का वक्त होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कैंपेन पर ब्रिटिश पीएम कैमरन 20 मिलियन पाउंड खर्च करेंगे। सरकार इस सिलसिले में माइग्रेंट्स की मदद के लिए क्लास लगाने की बात कर रही है। पीएम कैमरन माइग्रेंट्स की अंग्रेजी सुधारने के लिए अंग्रेजी क्लास का इंतजाम करेंगे। उनका कहना है कि यूएके में अपॉरच्युनिटी हासिल करने के लिए इंग्लिश बहुत जरूरी है।

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