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मैं बिकने को तैयार हूं, बोलो कितने में खरीदोगे

कानपुर। मैं बिकने के लिए तैयार हूँ। बोलो कितनी कीमत दोगे। यह लाइन जनपद में ब्लॉक प्रमुख चुनाव में बहुत महत्वपूर्ण बन चुकी है। मांगी कीमत मिलने पर प्रमाणपत्र ही नहीं खुद को भी बीडीसी ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी के हवाले करने को तैयार हैं। इसी तर्ज पर  जनपद में लोकतन्त्र को चूना लगाया जा रहा है। दो दिन पहले एक होटल से बरामद 37 बीडीसी इस बात को सही साबित करते हैं। हालाँकि स्वेच्छा से होटल में मौजूद होने की बात पर पुलिस भी उन्हें परिजनों के सुपुर्द करने के अलावा कुछ नहीं कर पाई। जनपद के सभी दस ब्लॉकों में प्रमुखी के लिए होने वाले चुनाव के लिए करोड़ों का खेल हो रहा है। वोट लेने और देने वाले लोकतन्त्र का मखौल उड़ा रहे हैं। लेकिन प्रशासन और चुनाव आयोग पूरी तरह से बेबस नजर आ रहा है।

ब्लॉक प्रमुख

ब्लॉक प्रमुख चुनाव : जनपद में 789 बीडीसी

जनपद के दस ब्लॉकों में 590 ग्राम सभाओं से 789 बीडीसी चुनकर पहुंचे हैं। जीतने पर चुनाव आयोग ने जीत का प्रमाण पत्र भी दिया है। यही प्रमाणपत्र और खुद को प्रत्याशी के पास जमा कर बदले में लोकतन्त्र को धता बताने वाला कृत्य किया जाता है। प्रत्याशियों से धन लेकर उनके पक्ष में होने का विश्वास देते हैं। मतदान के समय उन्हें यह प्रमाणपत्र वापस किये जाते हैं।

पांच लाख तक के ऑफर

ब्लॉक प्रमुख की संसद के इन सदस्यों से बात करने पर मालूम हुआ कि कई बाहुबली प्रत्याशियों ने इनके वोट की कीमत पांच लाख तक लगा दी है। लेकिन यह खेल पर्दे के पीछे होने के चलते कोई खुलकर कहने को तैयार नहीं है। हालाँकि इसके बाद भी प्रत्याशी सशंकित रहते हैं कि कहीं कोई जादा कीमत का लालच देकर इन सदस्यों को अपने पक्ष में न कर ले। इसीलिए यह जतन किये जा रहे हैं।

छिपा खेल तो प्रशासन बेबस

यह पूरा खेल ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी और सदस्यों के बीच खेला जा रहा है। सभी को इसकी भनक है। लेकिन प्रशासन कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा का कहना है कि बीडीसी मामले में खण्ड विकास अधिकारी से जाँच कराई जायेगी। मामला सामने आने पर ही कोई फैसला किया जा सकेगा। अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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