भविष्य निधि आयुक्त मांग रहे थे रिश्‍वत, गिरफ्तार

चेन्नई| केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्मचारी भविष्य निधि आयुक्‍त (क्षेत्रीय) सहित तीन अधिकारियों को रिश्वतखोरी के आरोपों में गिरफ्तार किया है। सीबीआई के एक अधिकारी ने, “सीबीआई ने चेन्नई के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त दुर्गा प्रसाद, ईपीएफओ के दो प्रवर्तन अधिकारियों और चार अन्य लोगों को लगभग 14.5 लाख रुपये के एक कथित रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्तार किया है।”

भविष्य निधि आयुक्त सहित कई पर मामला दर्ज

सीबीआई ने बाद में एक बयान में कहा कि क्षेत्रीय भविष्‍य निधि आयुक्‍त (ईपीएफओ के), दो प्रवर्तन अधिकारियों, शहर के एक संस्थान समूह और दलाल के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई के अनुसार, भविष्‍य निधि आयुक्‍त प्रसाद ने कथित तौर पर एक संस्थान समूह की मदद करने के एवज में उससे 25 लाख रुपये रिश्वत मांगे थे। यह मदद, समूह के कर्मचारियों के संदर्भ में कर्मचारी भविष्य निधि कटौती के उद्देश्य के लिए वेतन के साथ गड़बड़ी के मामले में करनी थी।

18 जगहों पर ली गई तलाशी

सीबीआई ने जाल बिछा कर उस वाहन को रोक लिया, जिस पर भविष्‍य निधि आयुक्‍त प्रसाद सवार थे और एक दलाल से 14.5 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेकर जा रहे थे। सीबीआई ने संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी को भी गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि रिश्वत की राशि उसी ने दलाल को कथित तौर पर सौंपी थी। भविष्‍य निधि आयुक्‍त प्रसाद के आवास और कार्यालय तथा अन्य 18 स्थानों की तलाशी ली गई, जिसमें दलाल के परिसर शामिल थे। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और संपत्ति दस्तावेज बरामद हुए।

ये होती है कर्मचारी भविष्‍य निधि

कोई भी सेवारत व्यक्ति सेवानिवृत्ति उपरांत के जीवन को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना चाहता है। इसमें उसके लिये कर्मचारी भविष्य निधि यानि ईपीएफ यानी सहायक होते हैं। अधिकतर कर्मचारियों के लिए यह अनैच्छिक बचत होती है, किन्तु सेवानिवृत्ति या असामयिक मृत्यु या अपंगता की स्थिति में कर्मचारी और उसके के परिवार के लिये ये अत्यंत लाभदायक होते हैं। इस निधि में कर्मचारी के मासिक वेतन से कुछ अंश (मूल वेतन का 12.5 प्रतिशत) स्रोत पर ही काट कर जमा कर लिया जाता है। इसके बराबर की ही राशि नियुक्तिकर्ता द्वारा भी जमा कराई जाती है और उस पर 8.5 प्रतिशत  की दर से मिलने वाला ब्याज भी मिलता है। उदाहरण के लिए यदि कर्मचारी की आयु 25 वर्ष है और उसका तत्कालीन वेतन 20 हजार रुपये है। तब यह मानकर चलें कि ईपीएफ में 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है और हर वर्ष उसके वेतन में 5 प्रतिशत की बचत होती है। ऐसे में यदि वह हर माह अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का12 प्रतिशत ईपीएफ में जमा कराता हैं और उतनी ही राशि उसके नियोक्ता द्वारा भी जमा कराई जाती है, तो सेवानिवृत्ति पर उसको 1.38 करोड़ रुपये की अद्भुत राशि मिलेगी। निधि में जमा होने वाली राशि मासिक रूप से कर्मचारी के वेतन से काटकर उसमें नियोक्ता का अंश (12.5 %) मिलाकर उसे में जमा कराया जाता है।

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