भारत की हालात ठीक नहीं, फॉर्च्यून 500 कंपनियों मे सिर्फ 2.6 फीसदी मानती हैं निवेश लायक

कोरोना संक्रमण की वजह से दुनिया भर में कारोबारी गतिविधियों को भारी झटक लगा है. ऐसे में इकनॉमी के हालात सुधरने में काफी वक्त लग सकता है. फॉर्च्यून 500 की लिस्ट में शामिल कंपनियों में से 52.4 फीसदी का कहना है कि कोरोनावायरस संक्रमण से पहले इकनॉमी की जो स्थिति थी उस स्थिति में इसे आने के लिए 2022 की पहली तिमाही तक इंतजार करना पड़ सकता है. 25 फीसदी का कहना है कि आर्थिक गतिविधियां 2023 की पहली तिमाही से पहले रफ्तार नहीं पकड़ पाएंगीं.

कइयों का मानना है कि चीन से जो कंपनियां निकलना चाहती हैं, वे भारत आ सकती हैं. लेकिन फॉर्च्यून 500 कंपनियों में शामिल कंपनियों में से सिर्फ 2.6 फीसदी ने भारत को निवेश के लिए बेहतर जगह माना. 74.3 फीसदी कंपनियों का कहना था कि अगले साल निवेश के लिए सबसे अच्छी जगह अमेरिका होगी. नौ फीसदी ने चीन को निवेश के लिए पसंदीदा जगह बताया. इन कंपनियों के 11.5 फीसदी सीईओ माना कि वे एशियाई देशों में निवेश कर सकते हैं लेकिन चीन में नहीं करेंगे.

सर्वे में कहा है कि बिजनेस से जुड़े ट्रैवल को कोरोना संक्रमण से पहले की स्थिति में आने में भी काफी समय लगेगा. उनका मानना है कारोबार को लेकर होने वाली यात्रा को पहले के स्तर तक पहुंचने में 2022 की पहली तिमाही तक समय लग सकता है.

दरअसल फॉर्च्यून 500 कंपनियों के सीईओ के बीच कराए गए इस सर्वे से पता चलता है कि दुनिया की दिग्गज कंपनियां कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर क्या सोच रही हैं और वो इस संकट से निकलने के लिए क्या कर रही हैं. निवेश के बारे में उनकी राय से पता चलता है कि इकनॉमी में रफ्तार को लेकर उनकी भूमिका क्या होगी. इस सर्वे से साफ हो गया है कि बिजनेस सेंटिमेंट अभी इतनी जल्दी नहीं सुधरेंगे. सामान्य स्थिति के लिए लंबा इंतजार करना होगा.

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