भारत के इस स्वर्ग पर पाकिस्तान ने किया गैर-कानूनी तरीके से कब्जा  

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पाकिस्तान प्रकाशित कश्मीर और गिलगित- बाल्टिस्तान ये दोनों अलग-अलग क्षेत्र हैं. पाकिस्तान इस इलाके पर अपना हक जमाए बैठा है. कशिम्र का हिस्सा होने के नाते यह भारत का अंग है. पाकिस्तान इस इलाके पर कब्ज़ा ही नहीं बल्कि इसे अपना पांचवां प्रान्त भी बनाना चाहता है. उसने संसद में एक नया कानून बनाया है लेकिन भारत उस कानून का विरोध कर चूका है. हम सभी जानते हैं भारत इस इलाके को कश्मीर का ही हिस्सा मानता आ रहा है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान जबरदस्ती कब्जे वाले इस इलाके में किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकता है. क्योंकि उसके पास ऐसा करने का कोई कानूनी आधार नहीं है.भारत ने पाकिस्तान के तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान आदेश, 2018 के खिलाफ सख्त विरोध जताया है.

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क्या है भारत का पक्ष

1947 में भारत-पाकिस्तान बटवारे के आधार पर पूरा जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है. ‘गिलगित – बाल्टिस्तान’ इलाका उसी राज्य में शामिल है. पाकिस्तान को इस इलाके जबरदस्ती कब्जा नहीं करना चाहिए.

अभी के हालात कैसे हैं  

पाकिस्तान के अंदर एक स्वायत्तशासी क्षेत्र भी है. इस इलाके को शुमाली इलाक़े के नाम से भी जाना जाता था. पाकिस्तान येन केन प्रकारेण इसकी स्वायत्त स्थिति खत्म करना चाहता है. इसीलिए वो गिलगित -बाल्टिस्तान आदेश, 2018 नाम का नया कानून लेकर आया है, जिससे इस इलाके पर पूरी तरह से नियंत्रण किया जा सके.

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क्या है गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने 21 मई को एक नया आदेश जारी किया था, जिसके बाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र की स्वायत्ता में कटौती की गई है.

इस नए कानून ने ‘गिलगित-बाल्टिस्तान सशक्तिकरण और स्वशासन आदेश 2009’ की जगह ली है, जिसके तहत गिलगित-बाल्टिस्तान का स्थानीय परिषद खनिज, हाइड्रोपावर और पर्यटन संबंधित कानून बनाता था और इस पर फैसला लेता था.

अब इन सारे फैसले गिलगित-बाल्टिस्तान की विधानसभा लेंगे. नए क़ानून के तहत अब इलाके के लोगों को पाकिस्तान के अन्य चार प्रांतों की तरह अधिकार हासिल होंगे.

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कानून का विरोध

जब प्रदर्शनकारी सर्कार के खिलाफ विरोध करने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली की और जा रहे थे, तो उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ दिए और हवाई फायरिंग भी की थी. इस प्रदर्शन में सभी दलों के लोग शामिल थे. वे संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे थे.

क्या पाकिस्तान का कब्जा अवैध है

हां, गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा पूरी तरह अवैध है. न केवल ब्रिटिश संसद इसे कश्मीर का हिस्सा मानती है बल्कि यूरोपीय यूनियन भी इसे कश्मीर का ही बताता है. ब्रिटेन की संसद ने कुछ समय पहले एक प्रस्ताव पारित कर गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे को अवैध बताया था. ब्रिटिश संसद में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू एवं कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है. जबकि पाकिस्तान इस क्षेत्र को विवादित कश्मीर के क्षेत्र से पृथक क्षेत्र मानता है. केवल यही नहीं पाकिस्तान ने 1963 में इस इलाके के एक छोटे हिस्से शक्स्गम घाटी को चीन को दे दिया. पाकिस्तान 1947 से गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पीओके पर अवैध कब्जा जमाए हुए है. विभाजन के समय न तो यह हिस्सा भारत का था और न ही पाकिस्तान का था.

कब ये भारत को मिला

31 अक्टूबर 1947 को कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने जब विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए तब इस इलाके का भारत में विलय हो गया लेकिन हरि सिंह के इस कदम के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने विद्रोह कर दिया. उसने दो नवंबर 1947 को गिलगित-बाल्टिस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया. 21 दिनों तक इसकी यही स्थिति बनी रही. 21 दिन बाद पाकिस्तान इस क्षेत्र में दाखिल हुआ. इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया.

और क्या कहता है ये प्रस्ताव

इस प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया है कि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान के लोगों को उनके फंडामेंटल राइट्स और राइट ऑफ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन से महरूम कर रखा है. इस प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत वहां किसी भी कंस्ट्रक्शन को विवादित एरिया में हस्तक्षेप समझा जाएगा.

पाकिस्तान लगातार कर रहा उल्लंघन

पाकिस्तान इस इलाके में चीन के साथ जो भी कंस्ट्रक्शन कर रहा है, वो दरअसल स्वायत्तशासी क्षेत्र में है और नियमों का उल्लंघन कर इस बनाया जा रहा है. इस इलाके में चीन के 24 हजार सैनिकों की तैनाती भी बड़ा वॉयलेशन है.

पाकिस्तान इसे पांचवां प्रांत बनाने को हुआ उतावला
पाकिस्तान चीन को खुश करना चाहता है.चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी इलाके से गुजरने वाला है. चूंकि ये विवादित इलाका है, इसलिए चीन चाहता है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के तैयार होने के पहले इसके तमाम कानूनी पहलू पूरे कर लिए जाएं.

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भारत के लिए क्यों है जरुरी है ये इलाका

यह इलाका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से लगा हुआ है. भौगोलिक स्थिति की वजह से ये इलाका भारत के लिए बहुत खास है.

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