आखिर भारत के युवा क्यों परेशान हैं ?

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नई दिल्ली। भारत के युवा की आर्थिक दर 10 फीसदी होने की बात कही जा रही है। लेकिन इसमें अभी समय है। कहा जा रहा है कि साल 2025 तक भारत की स्थिति में सुधार हो सकता है। हालांकि भारत के लिए यह एक ख़ुशी का अवसर होगा। लेकिन दूसरी तरफ, सरकारी सर्वे में सामने आया है कि पिछले सात सालों में रोजगार वृद्धि की दर निचले स्तर पर है।

नेशनल सेंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के अनुसार देशभर में सिर्फ 3.5 फीसदी युवा ही सिर्फ ऐसे हैं जिनके पास हुनर है, जबकि चीन में 45 और अमेरिका में 56 फीसदी लोग स्किल ट्रेंड हैं। कहा जा रहा है कि पिछले एक साल में ही भारत में बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ी है। यह भारत के लिए शर्मनाक बात है।

 भारत के युवा

भारत के युवा , पिछले एक साल में 2 करोड़ बेरोजगार युवा की बढ़ी संख्या

हाल ही में,आए दो ताजा सर्वे भारत में युवाओं की बढ़ती परेशानी और रोजगार के कम होते अवसरों को दिखाने वाले हैं। NSSO और अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ (ILO) द्वारा कराए गए एक सर्वे में रोजगार वृद्धि की दर भारत के शहरी इलाकों में 3.4 और ग्रामीण इलाकों में 1.7 फीसदी है। जबकि इससे पिछले सत्र में शहरी क्षेत्र में रोजगार वृद्धि की दर 3.5 और साल 2013 में 4.8 फीसदी थी। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में साल 2013 के मुकाबले 0.2 फीसदी रोजगार बढ़े हैं। कुल मिलाकर इस समय देश में लगभग 2 करोड़ युवा बेरोजगार हैं।

प्राइवेट सेक्टर से दूर हुए युवा

यह आर्थिक संकट साल 2009 में आए के दौरान निजी कंपनियों ने ताबड़तोड़ कर्मचारियों की छंटनी की थी, जिसके बाद से निजी क्षेत्र के प्रति युवाओं का मोह कम हुआ है। सरकारी नौकरी की उम्मीद में कर्मचारी चयन आयोग की साल 2013-14 की 6 परीक्षाओं में भागीदारी करने वाले कैंडिडेट्स की संख्या एक करोड़ से ज्यादा थी।

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