भीख मांगना है भारत में भिखारियों का सबसे बड़ा उद्योग

हाल के सालों में भारत की आर्थिक विकास दर तेजी से बढ़ी है। लेकिन भिखारियों का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा है। भारत में गरीबी है लेकिन भीख संगठित रूप से मांगी जाती है। एरिया बंटा रहता है, कोई दूसरा उस क्षेत्र में भीख नहीं मांग सकता। हर भिखारी के ऊपर उसका सरगना होता है जोकि भीख में मिले पैसे में से एक हिस्सा लेता है।

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इसीलिए भिखारियों को लेकर कोई भी अभियान सफल नहीं हो पाता है क्योंकि ऐसी आदत पड़ चुकी है कि कोई काम करना ही नहीं चाहता। कहते भी हैं कि जब बिना किसी काम धाम के सुबह से शाम तक हजार, दो हजार रुपये मिल जाते हैं तो काम कौन करे। काम करने पर इतना पैसा थोड़े ही मिलेगा।

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भीख लेने का घोटाला

मुम्बई में घूमने आए लोगों को अक्सर भिखारी पकड़ लेते हैं और बच्चे को दूध पिलाने के लिए मदद मांगते हैं। वह आपको नजदीक की दुकान पर भी ले जाते हैं दुकानदार दूध का डिब्बा भी देगा। लेकिन आपसे पैसे उस डिब्बे पर छपी बढ़ी हुई कीमत के लेगा जिसे बाद में भिखारी और दुकानदार आपस में बांट लेते हैं। डिब्बा वापस हो जाता है।

दूसरा घोटाला भिखारी अक्सर किराये पर बच्चा उधार भी देते हैं ताकि लोग तरस खाकर ज्यादा भीख दें। सबसे ज्यादा भीख वहां मिलती है जहां लोग घूमने या तफरीह करने जाते हैं। या फिर धार्मिक स्थल के आसपास।

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कैसे भीख मांगना है कैसे आपके पीछे दौड़ना है विदेशियों से कैसे ज्यादा पैसे झटक लेने हैं इसके लिए ये भिखारी बाकायदा ट्रेंड होते हैं। विदेशी यह सोच कर ज्यादा पैसे दे देते हैं कि वह इनकी मदद कर रहे हैं।

केंद्र सरकार बेघर और बेसहारा लोगों को आश्रय, स्वास्थ्य सुविधाएं और कौशल विकास का प्रशिक्षण देने की योजना पर विचार कर रही है ताकि इस समस्या का निदान किया जा सके लेकिन सफलता मिलना मुश्किल ही लगता है जबतक कि भीख मांगने पर इस देश में रोक नहीं लग जाती।

ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी, ब्रिटेन द्वारा किये गये गरीबी के आकलन के अनुसार भारत में 34 करोड़ लोग बेसहारा हैं और यह देश संघर्ष प्रभावित अफगानिस्तान के बाद दक्षिण एशिया का दूसरा सबसे बड़ा गरीब या भिखारियों का देश है।

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