कैदियों ने की भूख हड़ताल, कर रहे हैं आजादी की मांग

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देहरादून। इन दिनों जेल में बंद कैदी भी आंदोलन कर रहे हैं। आगरा और बरेली सेंट्रल जेल में पहले ये बात सुनने में आई। अब ये आग उत्तराखंड जेलों तक भी पहुंच गई। जेल में बंद चौदह साल की सजा काट चुके कैदियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दिया।

भूख हड़ताल

रिहाई की मांग लेकर कर रहे हैं भूख हड़ताल

प्रदेश में बीस कैदियों ने रात का भोजन खाने से इन्कार कर दिया। हालांकि देर रात जेल अधीक्षक ने दावा किया कि मानमनोव्वल के बाद कैदियों ने खाना खा लिया। बताया जा रहा है कि कैदियों ने मांग पूरी न होने पर सोमवार से भूख हड़ताल का ऐलान किया है।

हरिद्वार जेल में बंद चौदह साल की सजा काट चुके कैदियों में सरकार के खिलाफ गुस्से की सुगबुगाहट नजर आने लगी थी। जेल अधिकारियों का माथा दोपहर उस वक्त ठनका जब उन्हें कैदियों की तरफ से एक गुमनाम पत्र मिला।

जेल अधीक्षक एसके सुखीजा ने पत्र मिलने की पुष्टि की और बताया कि गुमनाम पत्र जेलर एसएम सिंह को भेजा गया है। इसमें लिखा गया है कि 14 साल सजा काटने के बाद भी सरकार बंदियों की रिहाई नहीं कर रही है। इससे बंदी आहत हैं। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में वे सोमवार से भूख हड़ताल करेंगे।

जेल अधीक्षक ने बताया कि देर सायं उन्हें बीस कैदियों के भोजन ग्रहण न करने की जानकारी मिली। इस पर उन्होंने कारागार पहुंचकर कैदियों से वार्ता की। अधीक्षक ने दावा किया कि काफी देर समझाने के बाद बंदियों ने खाना खा लिया।

कैदियों की मांग के संदर्भ में जेल अधीक्षक ने बताया कि चौदह साल से ऊपर सजा काट चुके कैदियों को रिहा करने का कोई प्रावधान नहीं है। सिर्फ राष्ट्रपति और राज्यपाल को ही यह अधिकार प्राप्त है।

 

काबिलेगौर है कि उम्रकैद की सजा होने पर कैदियों को आजीवन जेल ही रखा जाता है। पूर्व में आजीवन कारावास की अवधि चौदह साल मानी जाती थी। इस श्रेणी के कैदियों की मांग है कि उनकी रिहाई की जाए। इसके लिए शासन फैसला ले। इसी मांग को लेकर आगरा और बरेली सेंट्रल जेल में बड़ी संख्या में कैदी भूख हड़ताल पर हैं।

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