माघ मेला में भूलेभटके बाबा सक्रिय

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इलाहाबाद। माघ मेला और कुम्भ मेला में अपनों से बिछुड़े लोगों को मिलाने का काम प्रतापगढ़ निवासी राजाराम तिवारी उर्फ भूलेभटके बाबा पिछले 70 साल से करते आ रहे हैं।  उनकी उम्र अब 88 वर्ष हो चुकी है। लेकिन लगन और जुनून अभी भी वही है। उनके काम से प्रभावित होकर अभिताभ बच्चन टीवी शो आज की रात है जिंदगी में राजाराम तिवारी को सम्मानित कर चुके हैं।

भूलेभटके बाबा

बुजुर्ग महिला को मिलाकर चल पड़ा कारवां

1046 में कुंभ मेले के दौरान एक बुजुर्ग महिला अपने  परिवार से बिछुड़कर भटक रही थी। उस समय मेले में लाउडस्पीकर की व्यवस्था भी नहीं थी, जिससे घोषणा कर महिला को परिवार से मिलाया जा सके। महिला की मुलाकात राजाराम तिवारी से हुई। राजाराम ने दिन रात एक कर महिला को उसके परिवार से मिलाया। उस महिला के दर्द को देखने के बाद तिवारी के मन में यह विचार आया कि अपनों से बिछडऩे का दर्द दुनिया का सबसे बड़ा दर्द है। यदि इस दर्द को दूर किया जाय तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं हो सकता। और उन्होंने शिविर लगाना शुरू कर दिया। स्थानीय लोग इन्हे भूले-भटके बाबा के नाम से पुकारते हैं।

rajaram tiwari shivir

भूलेभटके बाबा का शिविर

18 साल की उम्र से भूलभटके बाबा उर्फ राजाराम तिवारी संगम तट पर  भूले-भटके शिविर लगाकर लोगों को अपनों से मिलाने का काम करते आ रहे हैं। शिविर में पहुंचे लोगों से नाम की पर्ची ली जाती है उसके बाद उस नाम की घोषणा लाउडस्पीकर के माध्यम से की जाती है। जिसे सुनकर लोग अपनों से मिल जाते हैं। कुछ जानकार लोग खुद ही शिविर में आकर अपनों की तलाश शुरू कर देते हैं। इस कार्य में राजाराम कुछ युवकों को शामिल कर चुके हैं। जो समाजसेवा की भावना से निस्वार्थ भाव से यह काम कर रहे हैं।

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