भ्रष्‍टाचार: प्रीमियम राशि निगल गए अधिकारी

कौशाम्बी। भ्रष्टाचार और घोटाले को रोकने के लिए भरपूर कोशिश की जा रही है लेकिन भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बस तरीका बदल रहा हैं। सरकार की तरफ से किसानों के लिए तमाम योजनाएं शुरू की जा रही हैं लेकिन उनका लाभ किसानों का कम ही मिल रहा है। वहीं उसको लागू करने वाले इसका ज्यादा लाभ उठा रहे हैं। कुछ ऐसी योजनाएं हैं जिनको किसान जानते तक नहीं। यहां एक ऐसे योजना की बात की जा रही है जिसकी जानकारी किसानों को देकर उसके लाभ से हर साल वचिंत कर दिया जाता है। भ्रष्‍टाचार की जडें काफी गहरी हो चुकी हैं।

भ्रष्‍टाचार

भ्रष्‍टाचार का है मामला

कौशांबी जिले में सक्रिय सहकारी समितियों पर किसानों ने आरोप लगाया है कि किसानों से उनकी फसल की बिमा करने के लिए प्रीमियम की पूरी राशि वसूली गई है, लेकिन फसल बर्बाद होने पर उनको बीमे का भुगतान नहीं किया गया। किसानों का यह भी कहना है कि अधिकारी और क्लर्क ने इस रकम को आपस में बांट लिया है। फसल बर्बाद होने के बाद मुआवजे के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं।

क्या है खेल
किसानों से बीमा की प्रीमियम के लिए पैसा वसूल लिया जाता है लेकिन बीमा कराया नहीं जाता है। सही सलामत फसल निकल जाने पर बीमा की जरूरत ही नही पड़ती। लेकिन इस बार फसल बर्बाद होने पर किसान जब बीमा की राशि की मांग करने पहुंचे तो खुलासा हो गया। इसके लिए जिले के 18 लाख की आबादी में 70 फीसदी किसान को रजिस्टर्ड किया गया है। इस समय जिले के आठ ब्लाकों में 16 से अधिक सहकारी समितियां काम कर रही हैं। फसल की बीमा के लिए किसानों को खाद के मूल्य के साथ पांच प्रतिशत फसल बीमा के लिए जमा करना पड़ता है। लेकिन यह रकम बीमा करने के लिए नही बल्कि अधिकारी अपना जेब भरने के लिए करते हैं। सरकारी अधिकारियों को किसानों की परवाह ही नहीं है।

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