मथुरा हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की CBI जांच की मांग

0

दिल्ली/मथुरा। मथुरा हिंसा की सीबीआई जांच की मांग करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि मथुरा हिंसा मामला इलाहाबाद कोर्ट में लंबित है। जब तक यह मामला हाइकोर्ट में है तब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई भी फैसला नहीं ले सकता है। मामले की जांच अभी राज्य स्तर पर हो रही है।

केंद्र सरकार अभी इसकी सीबीआई जांच नहीं करा सकती है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य स्तर पर हो रही जांच में किस जगह ढिलाई बरती जा रही है, इसका सबूत लाकर दे। जब तक हमारे पास इस बात का कोई सबूत नहीं आता है तब तक केंद्र सरकार इसके लिए हामी नहीं भर सकती है।

मथुरा हिंसा

वहीं दूसरी ओर याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार मुआवजा देने में पक्षपात न करे। जिस प्रकार प्रतापगढ़ के कुंडा में डीएसपी जिया उल हक और अखलाक को यूपी सरकार ने मुआवजा दिया उसी तरह  मथुरा हिंसा में भी मारे गए पुलिसकर्मियों को मुआवजा दिया जाए। केंद्र सरकार इस बात के लिए यूपी सरकार को निर्देश दे।

बता दें कि बीजेपी के नेता अश्विनी उपाध्याय ने मथुरा में हुए कांड की सीबीआई जांच कराने के लिए याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि मथुरा हिंसा का मास्टरमाइंड राम वृक्ष यादव यूपी सरकार के नामी लोगों की मिलीभगत से समानांतर सरकार चला रहा था। याचिका के मुताबिक, ‘स्थानीय निवासी मानते थे कि यादव उत्तर प्रदेश सरकार में कुछ मंत्रियों के बेहद करीब था, इसलिए स्थानीय प्रशासन उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाहता था।

‘इस याचिका पर न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष तथा न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई मंगलवार को करने पर सहमति जताई थी।

क्या था मामला

बीते दिनों मथुरा स्थित जवाहर बाग को खाली कराने पहुंची पुलिस और सत्याग्रहियों के बीच टकराव हो गया था। जिसमें हुई फायरिंग के बाद एक एसओ फरह संतोष कुमार और एसपी समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। 23 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस जवाहर बाग में बागवानी विभाग की करीब 250 एकड़ जमीन पर अवैध कब्‍जे को हटाने पहुंची थी।

कई साल से जमाए हैं कब्‍जा

हजारों कथित सत्याग्रही बाग पर कई साल से कब्जा जमाए है। हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासन पिछले दो माह से बाग खाली कराने की तैयारियों में लगा था। मथुरा स्थित जवाहरबाग सरकारी जमीन है। इस पर करीब 100 एकड़ का बाग है। खुद को सत्याग्रही बता रहे लोग साल 2014 में बरेली से भगाए गए थे जिसके बाद इन्हें मथुरा प्रशासन द्वारा जवाहर बाग की जगह दी गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि खुद को सत्याग्रही की बताने वाले लोगों को सत्ता प्रतिष्ठान का भी सहयोग प्राप्त है।

लाखों की संपत्ति की हुई क्षति

इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस में बताया गया था कि करीब 3000 लोग बीते दो साल से उद्यान विभाग की राजकीय संपत्ति जवाहर बाग में धरना प्रदर्शन के नाम पर अवैध कब्जा किए हैं। इसके कारण राजकीय संपत्ति को लाखों रुपये की क्षति पहुंची है। सत्याग्रहियों के खिलाफ 10 से अधिक मुकदमे पंजीकृत हैं।

loading...
शेयर करें