लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण ही दरअसल लोकतंत्र है : डॉक्टर अब्दुल गनी अल्कूफी

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(सगीर ए खाकसार)
सिद्दार्थ नगर। 26 जनवरी 2017 विश्व के महान लोकतंत्र पडोसी देश भारत का ६८वां  गणतंत्र दिवस था। इस अवसर पर पूरे देश में फैली हुई अन्य संस्थाओं की तरह मदरसों में भी विविध और रंग बिरंगे कार्यक्रम रखे गए। झंडा फहराया गया। ऐसा ही एक कार्यक्रम सिद्धार्थनगर के जामिया अलिस्लाह  कठयला में आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय मदरसा संघ नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ। अब्दुल गनी अल्कूफी और राष्ट्रीय महासचिव मौलाना मशहूद खान नेपाली को आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ अल्कूफी ने पड़ोसी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि भारत में जहां एक बहुत बड़ी संख्या में मुस्लिम अल्पसंख्यक मौजूद है और इस महान लोकतंत्र ने उन्हें कानूनी दृष्टि से जो महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया है वह हमारे देश नेपाल के मुसलमानों के लिए भी प्रेरित करने और प्रोत्साहन का कारण है। राष्ट्रीय गान का यह मिसरा (मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना) राष्ट्रीय एकता का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रदान करता है।  उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल एक नारा नहीं बल्कि वास्तव में लोकतांत्रिक और स्वस्थ मूल्यों को बढ़ावा देने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का नाम लोकतंत्र है। भारत में उसकी जड़ों काफी मजबूत हैं। कुछ असामाजिक तत्व इसे कमजोर करने पर आमादा हैं। हमें उनसे इस देश की रक्षा करनी होगी।
मदरसों में भी विविध

मदरसों में भी विविध और रंग बिरंगे कार्यक्रम रखे गए

मौलाना मशहूद खान नेपाली ने कहा कि पिछले दिनों से पड़ोसी देश नेपाल में प्रारंभ अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान और उसकी ओर प्रगति भारत के महान लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश है। हमारे देश नेपाल ने भी अब भारत के (अनेकता में एकता) के प्रदर्शन को अपनी उन्नति का मन्त्र बनाने का लक्ष्य रखा है। अल्लाह उस के बढ़ते कदम को दृढ़ता नसीब करे। और दोनों देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करे। और उन्हें आने वाले ख़तरों से सुरक्षित रखे।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय मदरसा संघ नेपाल ने नेपाल स्थित भारतीय दूतावास को भी गणतंत्र दिवस का बधाई पत्र भेजा है। भारतीय दूतावास‘ नेपाल के विकास के लिए शिक्षा सहित विभिन्न मदों में अच्छी खासी राशि खर्च करता है। जिसके लिए वह पूरी नेपाली जनता द्वारा धन्यवाद के पात्र और योग्य हैं। संगठन की मांग है कि अन्य क्षेत्रों के साथ साथ विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में भारत जो राशि खर्च करता है। लोकतांत्रिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उस से मुस्लिम अल्पसंख्यक को भी लाभान्वित होने का अवसर प्रदान करे। ताकि मुस्लिम छात्र भी साइनस’ मीडीकल’  इंजीनियरिंग’ कंप्यूटर विज्ञान और अन्य समकालीन क्षेत्रों में इससे लाभ उठा सकें। और मुस्लिम प्रतिभाओं को भी उभर कर सामने आने का औसर मिल सके। और वह भी देश और राष्ट्र के विकास में सभी देशवासियों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर अपना योगदान दे सकें। और अपनी भूमिका निभा सकें।
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