#Review जब एक हीरो बन गया मदारी

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मुबई। आपको तो पता ही होगा की अगर हम किसी को सोते हुए जगाये  तो उसके लिए काफी मसक्कत करनी पड़ती है, लेकिन हमको जब 100 करोड़ की जनता ही सो जाए…तो उसे उठाने के लिए क्या धमाके से असर होगा? केवल डमरू बजाने से क्या 100 करोड़ लोगों की नींद टूट जाएगी? शायद हां। क्योंकि जब आप एक सुपरस्टार का चोंगा उतारकर, फिल्म में उतरते हैं, तो तमाशा होना लाज़िमी है। और इरफान अपनी फिल्म में डमरू बजाकर पूरी फिल्म को मदारी की तरह अपने इर्द गिर्द घुमाने में कामयाब रहे हैं।

मदारी

ऐसी है मदारी की कहानी

फिल्म की कहानी निर्मल कुमार (इरफ़ान खान) की है जो किन्ही कारणवश चीफ मिनिस्टर के बेटे को अगवा करता है , और उसके बाद पूरा सरकारी तंत्र चीफ मिनिस्टर के बेटे का पता लगाने में लग जाता है , अब निर्मल कुमार आखिरकार ऐसा क्यों करता है? और क्या उसे पकड़ पाने में सरकार समर्थ हो पाती है? इसका पता आपको फिल्म देखकर ही चलेगा.

स्क्रिप्ट 

फिल्मांकन के दौरान लोकेशंस भी काफी उम्दा हैं, और देश के रेगिस्तान से लेकर पहाड़ों तक कैमरे का काम काबिल ए तारीफ़ है. ख़ास तौर से रेगिस्तान में चल रहे एक कीडे के पैरों का सीन भी आपको आकर्षित कर जाता है.

अभिनय 

फिल्म में इरफ़ान खान की मौजूदगी कई सारे दृश्यों को और भी जानदार बना देती है. उनकी आँखों के साथ ही लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो जाता है. साथ ही फिल्म में जिम्मी शेरगिल, विशेष बंसल, तुषार दल्वी और बाकी कलाकारों का काम भी अच्छा है.

कमजोर कड़

फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी लंबाई है, इंटरवल के बाद फिल्म काफी लंबी लगने लगती है, हालांकि क्लाइमेक्स अच्छा है. फिल्म की लंबाई को कम किया जाता, तो यह और भी ज्यादा क्रिस्प लगती.

संगीत 

फिल्म का संगीत अच्छा है जो आपके भीतर के इमोशंस को बाहर लाने पर विवश करता है.सुखविंदर सिंह की आवाज में गाया हुआ गीत फिल्म में कई बार आता है जो सीन की गंभीरता को सहज बनाता है.

फिल्म – मदारी

डायरेक्टर -निशिकांत कामत स्टारकास्ट

इरफान, जिम्मी शेरगिल, विशेष बंसल

 

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