सुनिए…मनहूस थाने की कहानी, पुलिस की जुबानी

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बेंगलुरु। मलूर पुलिस थाने को लेकर इन दिनों एक अजीब मामला सामने आया है। पिछले साल अक्टूबर में यहां एक पुलिस इंस्पेक्टर ने अपने चेंबर में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद अब कोई भी पुलिसकर्मी उसकी जगह लेने को तैयार नहीं है।

मलूर पुलिस थाने

मलूर पुलिस थाने का मनहूस सच

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलूर पुलिस थाने की एक नई इमारत बनकर तैयार है, इसके बावजूद यहां के पुलिसकर्मी पुरानी इमारत से काम करने को तवज्जो देते हैं। अक्टूबर से लेकर अबतक इस थाने के दो कॉन्स्टेबल हादसों में मारे गए हैं, जबकि दो अन्य को गंभीर चोटें आई हैं।

इन हादसों के कारण पुलिसकर्मियों में यहां काम करने से हिचक बढ़ गई है। ‘बुरी किस्मत’ को दूर भगाने के लिए पुलिस थाने के अंदर एक हवन भी कराया गया। पिछले साल अक्टूबर में 42 साल के इंस्पेक्टर राघवेंद्र ने पुलिस थाने के अंदर अपने चेंबर में आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद कुछ दिनों के लिए उनके चेंबर को बंद कर दिया गया।

नवंबर में इसी पुलिस थाने के दो पुलिसकर्मी एक सड़क दुर्घटना में मारे गए। ड्यूटी के लिए थाने आते समय उनकी मौत हुई। कुछ दिनों बाद थाने के दो अन्य पुलिसकर्मी- मुरली और रामकृष्ण को भी अलग-अलग घटनाओं में चोट आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। एक के बाद एक हुई इन घटनाओं के कारण मलूर पुलिस थाने के बाकी सभी पुलिसकर्मी काफी डर गए हैं।

थाने के एक सूत्र के मुताबिक, पुराने पुलिस थाने में कभी इस तरह के हादसे नहीं हुए। पुलिस स्टेशन की नई इमारत का उद्घाटन जून 2016 में हुआ। लगता है कि जैसे ही पुरानी इमारत से नई इमारत में लोग शिफ्ट हुए, उसी समय से दिक्कतें भी शुरू हो गईं। पुलिसकर्मियों के बीच भरोसा कायम करने के लिए थाने में हवन भी कराया गया।

पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन दावों को गलत बताया। उनका कहना है कि मलूर थाने में कोई भी पद खाली नहीं है और सभी रिक्त पदों पर भर्ती हो गई है। राजधानी बेंगलुरु से मलूर की दूरी करीब 45 किलोमीटर है। यह कोलार जिले में आता है। मलूर पुलिस थाने पर 50 से अधिक गांवों में कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी है।

Edited by- Jitendra Nishad

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