महागठबंधन की कोशिश में जुटी कांग्रेस और बीजेपी

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महागठबंधन देहरादून। उत्तराखंड की सियासत के समय जोरो पर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब दावेदार पार्टियां गठबंधन की कोशिश में लग गई हैं। उत्तराखंड रक्षा मोर्चा ने प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प के दावे के साथ महागठबंधन का बिगुल बजा दिया है।

महागठबंधन से पहले कांग्रेस और भाजपा पर लगाया आरोप

पहले चरण में सामाजिक, राजनीतिक और सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े छह संगठनों ने महागठबंधन में शामिल होने की घोषणा की है। शनिवार को मोर्चा की इंद्रानगर स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में हुई बैठक में ये संगठन मोर्चा में शामिल भी हो गए हैं। बैठक में मोर्चा नेताओं ने एकसुर में कहा कि कांग्रेस और भाजपा ने सिर्फ राज्य की सत्ता हथियाने का ही काम किया है। 16 साल में विकास के बजाय आज भी उत्तराखंड पिछड़ रहा है।

भाजपा और कांग्रेस ने रोका उत्तराखंड का विकास

वर्तमान में निजी हितों को लेकर विधायकों के असंतोष ने राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। पूर्व में दोनों पार्टियों ने अपने फायदे के हिसाब से चलकर उत्तराखंड का विकास अवरुद्ध किया है। मुख्य संयोजक पीसी थपलियाल ने कहा कि प्रदेश में तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा न हो, इसलिए दोनों पार्टियों ने अन्य दल से आने वाले विधायकों को मंत्री या दायित्वधारी बनाने जैसे परपंच रचे हैं।

बैठक में मोर्चा और महागठबंधन को मजबूती देने, कांग्रेस भाजपा द्वारा महा गठबंधन को तोड़ने की साजिश की संभावना से बचने आदि मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दल के मुख्य संयोजक थपलियाल ने बताया कि देवभूमि विकास पार्टी, नवक्रांति स्वराज मोर्चा, गरीब क्रांति, नव चेतना मंच, एक्स सर्विस मैन लीग, पूर्व अर्द्ध सैनिक संगठन शनिवार को महा गठबंधन में शामिल हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब बहुमत के लिए चाहिए 32 सीटें

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के नौ बागी विधायक की सदयस्ता रद कर दी गई है। जिसके बाद अब उत्तराखंड विधानसभा में कुल 62 सीटें हर गई हैं। जिसके साथ अब विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 32 विधायक चाहिए। अब कांग्रेस के पास अब 27 विधायक रह गए हैं। साथ ही बीजेपी के पास भी इतने ही विधायक हैं। अब बाकि पार्टियों का समर्थन जिसके पास होगा वही उत्तराखंड में अपनी सरकार बनाने में सफल हो सकता है।

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