माँ के दूध का बैंक अब यूपी में भी जल्द खुलेगा

उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही राजधानी में मानव दुग्ध बैंक खोलने जा रही है। इस दूध का इस्तेमाल माँ के दूध से वंचित नवजातों को बचाने के लिए  किया जाएगा। प्रदेश में नवजात बच्चों की मृत्यु दर बहुत अधिक है। प्रदेश में इस तरह का यह पहला प्रयास है। जो कि कई जिलों में जन्म के तत्काल बाद नवजातों को माँ के दूध की पूर्ति करेगा। इसकी मुख्य इकाई लखनऊ में  रहेगी जो आपूर्ति की श्रृंखला तैयार करेगी।

माँ के दूध

आंकड़े बताते हैं कि पांच साल से कम उम्र के 13 फीसद बच्चों की मृत्यु स्तनपान से रोकी जा सकती है। यह बैंक माँ के दूध की प्रतिपूर्ति कर ऐसे बच्चों की मृत्यु दर घटाने का प्रयास करेगा। केजीएमयू के सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ और सीनियर फैकल्टी डा. विनोद जैन कहते हैं कि मां में दूध न बनने के अलावा भी तमाम कारण हैं जिनसे निपटने में इस बैंक से मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के बैंक राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में पहले से ही सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।

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माँ के दूध के डोनर का चयन

बैंक दूध डोनर का चुनाव करता है। उसे संग्रहीत करता है। उसका प्रसंस्करण और स्क्रीनिंग करता है और इसके बाद उसे नवजातों की जरूरत के मुताबिक वितरित करता है। दानता दूध पिलानेवाली माताओं का कड़े मानकों पर चयन किया जाता है। उनकी जांच कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह हेपेटाइटिस टाइप किसी बीमारी से ग्रस्त तो नहीं। इसमें ऐसी माताओं का चयन किया जाएगा जिनके ज्यादा दूध हो रहा है या जिनके नवजात बच्चे की मृत्यु हो चुकी है।

पीजीआई के प्रो. राकेश कपूर ने कहा कि मानव दूध में एंटीबॉडी होता है और यह शिशु को घातक संक्रमण से बचाता है। यहीं पर दो डाक्टर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस बैंक के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य क्षेत्र में नान प्रौफिट संगठन पाथ सहयोग कर रहा है। वह इस प्रोजेक्ट को अपना तकनीकी समर्थन दे रहा है। प्रोजेक्ट को शुरू होने में कुछ समय लग सकता है।

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