इस लड़की का पति बनना चाहेंगे, पहले थी ये लड़का

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वडोदरा (गुजरात)। बीते 30 मार्च को सेक्स चेंज की सर्जरी करवाकर लड़के से लड़की बनी ‘मानवी’ ने अब अपना बर्थडे भी बदल लिया है। इस बारे में मानवी का कहना है..‘वैसे, मेरा जन्म तो 27 अप्रैल को हुआ था, लेकिन अब मैं अपना बर्थडे 30 मार्च को ही मनाया करूंगी। क्योंकि, इस दिन मेरी सर्जरी हुई और मुझे नया जीवन मिला।’

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4-5 साल की उम्र में आने लगे थे शारीरिक बदलाव…

‘भरूच के खोबला गांव में मेरा जन्म एक लड़के के रूप में हुआ। मेरा नाम योगेश रखा गया था। परिवार में बहुत खुशी थी और घरवालों को मुझसे बहुत सारी अपेक्षाएं थीं। शुरुआत के 4-5 साल तो सबकुछ नॉर्मल रहा, लेकिन इसके बाद मुझमें शारीरिक बदलाव आने लगे। मुझे शर्ट-पैंट नहीं, बल्कि फ्रॉक पहनना पसंद था। मैं अक्सर लड़कियों के कपड़े ही पहनती थी। इससे मेरे परिजन मुझ पर बहुत गुस्सा होते थे। लेकिन, मैं तो खुद को लड़की ही मानती थी। हां, मुझे घरवालों की मर्जी के चलते अपनी हाईस्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई लड़के के रूप में ही करनी पड़ी।’।

साथ मरने की कसमें खाकर ले ली अपने प्यार की जिंदगी

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बचपन से ही लड़की की तरह रहना चाहती थी

मेरी स्कूल की पढ़ाई तो गांव के ही स्कूल में हुई। इस दौरान मेरी सबसे ज्यादा दोस्त लड़कियां ही थीं। मैं अक्सर लड़कियों के हाव-भाव, उनके पहनावे, उनके मेकअप के बारे में सोचा करती थी। मैं भी ऐसा करना चाहती थी, क्योंकि अब तक मेरे शरीर में पूरी तरह से बदलाव आ चुका था। लेकिन घरवालों के चलते मैं लड़कियों की तरह नहीं रह सकती थी। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद मेरा एडमिशन भरूच के कॉलेज में हुआ। कॉलेज में भी मेरी सबसे ज्यादा दोस्त लड़कियां ही थीं। लड़कियों की तरह हाव-भाव के चलते कॉलेज के लड़के-लड़कियां भी मेरा मजाक उड़ाया करते थे, लेकिन मुझे किसी की परवाह नहीं थी। मैं तो अपने आपको लड़की ही मानती थी।’

किन्नर बनना नहीं था पसंद

मानवी ने आगे बताया, ‘मेरा घर गांव में था और कॉलेज भरूच में। कॉलेज आने-जाने के दौरान ही मेरा संपर्क किन्नरों से हुआ। उनकी दोस्ती मुझे बहुत पसंद आई। अब मैं घर से तो योगेश बनकर निकलती थी, लेकिन रास्ते में लड़कियों के कपड़े पहन लिया करती थी। लड़कियों की तरह मेक-अप कर लेती थी। अब मैं किन्नरों की टोली में भी घूमने-फिरने लगी थी। एक दिन मुझे गांव के एक परिचित ने देख लिया। बात मेरे घर तक पहुंच गई। उस दिन घर पर मेरी बहुत पिटाई हुई। परिवार मेरी मर्जी के खिलाफ था। इसलिए मैं घर से भागकर वडोदरा आ गई और किन्नरों के साथ ही रहने लगी।’

प्रतिमाह 6 हजार रुपए कमाकर लाना अनिवार्य था

‘मैं ट्रांसजेंडर थी, लेकिन मैं किन्नर बनकर नहीं, बल्कि लिंग परिवर्तन कराकर लड़की बनकर जीना चाहती थी। किन्नरों के ग्रुप में जुड़ने के बाद मुझसे कहा गया कि अब तुम नर्वन (लिंग छेदन) करवाकर किन्नर बन जाओ, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया। किन्नरों के साथ मैंने लगभग 6-7 महीने का समय बिताया। जिंदगी का वह समय मैं कभी नहीं भूल सकती। किन्नरों का अलग-अलग ग्रुप होता है और हरेक ग्रुप का बॉस। बॉस के आदेशानुसार हर किन्नर को प्रतिमाह 6 हजार रुपए कमाकर लाना अनिवार्य था। अब चाहे इसके लिए अपना शरीर ही क्यों न बेचना पड़े।’

किन्नरों से पाया छुटकारा

अब मैं किन्नरों के साथ रहकर ऊब चुकी थी। किसी तरह उनसे छुटकारा पाना चाहती थी, लेकिन यह आसान नहीं था। इसी दौरान मेरी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई, जिसे किन्नर मामू कहकर बुलाया करते थे। मैंने उससे अपने मन की बात कही। उस व्यक्ति ने मेरी परेशानी समझी और मेरी मदद करने का विश्वास दिलाया। कुछ दिनों बाद वह मुझे वडोदरा के ‘लक्ष्य’ ट्रस्ट में ले आया। इस तरह पिछले तीन साल से मैं यहीं रह रही हूं। मैं पढ़ी-लिखी थी तो यहां मुझे नौकरी भी मिल गई। मैं यहां प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत हूं।

दो साल से ले रही थीं हार्मोन्स की दवा

पूरी तरह लड़की दिखने के लिए मैं पिछले दो साल से हॉर्मोन्स की दवा ले रही थी। लिंग परिवर्तन के लिए मैंने वडोदरा के सयाजी हॉस्पिटल से संपर्क किया था। डॉक्टर टाल-मटोल कर रहे थे, लेकिन मैंने तय कर लिया था कि किसी न किसी अस्पताल में अपना ऑपरेशन करवा लूंगी। मैंने ऑपरेशन के खर्च के लिए पैसे भी जमा कर लिए थे। इतना ही नहीं, मेरे कुछ दोस्त भी लिंग परिवर्तन करवाना चाहते हैं।

मां बनना चाहती है मानवी

मातृत्व के बारे में जब मानवी से पूछा गया तो उसने कहा, ‘ अभी तो ऑपरेशन ही हुआ है। कुछ समय बाद ही पता चल पाएगा कि मां बन सकती हूं या नहीं। अगर यह संभव हुआ तो इस पर विचार करूंगी। हालांकि, आधुनिक साइंस में अनेकों प्रयोग हो रहे हैं। कई तरह के ट्रीटमेंट भी हैं। इसलिए टेक्नोलॉजी की मदद से मैं अगर मां बनने में सक्षम हुई तो मैं मां बनना चाहूंगी।’

साभार: दैनिक भास्कर

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