बारिश लाएगी इस बार किसानों के अच्छे दिन

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र ही नहीं, देशभर के किसानों के लिए खुशखबरी है। दो साल से बारिश की कमी झेल रहे किसानों के लिए मानसून की बारिश अच्छे दिन लाएगी। केन्द्र सरकार ने कहा है कि इस साल मानसून सामान्य रहेगा। अगस्त-सितंबर में झमाझम बारिश हो सकती है। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि जून से खरीफ सत्र में फसल का रकबा और उत्पादन बढ़ाने की योजना तैयार करे।

मानसून की बारिश

मानसून की बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल मानसून की बारिश सामान्य से बेहतर होगी। इस साल मॉनसून 104 से 110 प्रतिशत तक रहने की बात कही जा रही है। मराठवाड़ा, विदर्भ और बुंदेलखंड सहित देश में कई कई इलाके ऐसे हैं, जहां सूखे के हालात हैं। इस खबर से उम्मीद बंधी है कि वहां के हालात भी सुधरेंगे। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक एल एस राठौड़ ने मंगलवार को बताया कि इस साल 6 फीसदी अधिक बारिश होने का अनुमान है।

वहीं, कृषि सचिव शोभना के पटनायक ने वर्ष एक सम्मेलन में कहा, अल नीनो (समुद्री सतह के तामान में बदलवा की घटना) के प्रभाव में गिरावट आ रही है। ऐसी उम्मीद है कि इसके बाद ‘ला नीना’ की स्थिति आयेगी और जिससे इस वर्ष मानसून बेहतर हो सकता है। मौसम विभाग का अनुमान इस माह के उत्तरार्ध में आएगा, जिसमें मानसून की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

कमजोर मानसून के कारण भारत का खाद्यान्न उत्पाइन फसल वर्ष 2014.15 (जुलाई से जून) में घटकर 25 करोड़ 20.2 लाख टन रह गया जो उसके पिछले वर्ष रिकॉर्ड 26 करोड़ 50.4 लाख टन के स्तर पर था। देश में 14 प्रतिशत कम बरसात होने के बावजूद चालू फसल वर्ष 2015.16 में उत्पादन मामूली बढ़त के साथ 25 करोड़ 31.6 लाख टन होने का अनुमान है। दो लगातार वर्ष में कमजोर मानसून रहने के कारण देश में कृषि संकट और जल की कमी का संकट उत्पन्न हुआ है।

बीते दो वर्ष में सामान्य से कम बरसात ने किसानों और संसाधनों के लिए संकट पैदा किया है। भूमि में नमी की सख्त कमी है। फरवरी में आर्थिक सर्वे में भी कहा गया था कि पिछले वर्ष जो प्रतिकूल मौसम पूरे देश में था वह संभवत: इस वर्ष नहीं होगा।हालांकि इसमें सुझाया गया है कि सरकार को फिर भी दलहन जैसी फसलों के लिए पहले से न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करने के अलावा किसी भी विषम स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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