IPL
IPL

मानीटरिंग देखें या मेला

मानीटरिंग छोड़कर माघ मेला क्षेत्र में सब कुछ बहुत तेज हो रहा है। विकास कार्यों ने अचानक गति पकड़ ली है। पाइप लाइन, बिजली के तार, बिजली के खंभे, चकर्ड प्लेटें तेजी से लगाई जा रही हैं। अस्थायी अस्पतालों, सेक्टर कार्यालयों का निर्माण भी तेज हो गया है लेकिन काम हड़बड़ी और जल्दबाजी में कराये जा रहे हैं। बस कोई पूछे नहीं।
धन की आई कमी 7 करोड़ की मांग
माघ मेले के लिए शासन ने 28 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है जबकि प्रशासन ने सात करोड़ रुपये के बजट की मांग और की है। प्रशासन का तर्क है कि मेले की अवधि बढ़ गई है, इसलिए अब अधिक बजट की जरूरत पड़ेगी।

MAGH MELA 2

करोड़ों का खेल कोई रिकार्ड नहीं

मेले के दौरान अस्थायी कार्यों पर करोड़ों की रकम खपा दी जाएगी और मेले के बाद इन कार्यों का कोई वजूद नहीं रह जाएगा।  शिविर उखाड़ दिए जाएंगे। पाइप लाइनें और चकर्ड प्लेटें हटा ली जाएंगी। अस्थायी शौचालयों की कोई गिनती नहीं रह जाएगी। अस्थायी अस्पतालों का भी कोई नामोनिशान नहीं रह जाएगा। मानीटरिंग न होने से करोड़ों कहां खर्च हुए, मेले में कितने लोगों को लाभ मिला, इसका कोई हिसाब-किताब नहीं रह जाएगा।

मानीटरिंग

मानीटरिंग न होने देने का खेल

मेला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर विभाग जानबूझकर काम देर से पूरा करते हैं ताकि अंत में जल्दबाजी में काम पूरा कर लिया जाए और इसकी मॉनीटरिंग न हो सके। इसी आड़ में करोड़ों रुपये का खेल हो जाता है और मेले के बाद कई अफसरों के शहर में नए बंगले बन जाते हैं। जबकि पिछले दो महीने से माघ मेले की तैयारी चल रही है। लेकिन काम गति नहीं पकड़ रहा था। अधिकारियों की वार्निंग की मियाद भी खत्म हो चुकी है। 24 जनवरी से मेला शुरू होना है लेकिन अब  तेज गति संदेह खड़े करती है।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button