चुनाव जीतने के लिए मायावती खेल रही हैं ये खेल

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बांदा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सातवीं बार हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भले ही सूखे का दंश झेल रहे बुंदेलखंड को तरजीह न दी हो, लेकिन बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने विधान मंडल के दोनों सदनों में बुंदेलखंड के बांदा जिले के वाशिंदों को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर सपा के लिए एक नजीर पेश की है।

मायावती

उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में विधानसभा की उन्नीस सीटें हैं, इनमें सात विधायक सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 27 जून को अपने मंत्रिमंडल का सातवीं बार विस्तार किया है, लेकिन उनकी नजर में सात में से एक भी विधायक मंत्री बनने के काबिल नहीं रहा। इसके उलट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती का भरोसा अब भी बुंदेलखंडी नेताओं पर है।

शायद यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा से इस्तीफा देने के बाद उनकी जगह बांदा जिले के गौरीखानपुर गांव के रहने वाले नरैनी विधानसभा सीट से बसपा विधायक गयाचरण दिनकर को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया है। बांदा जिले के शेरपुर स्योढा गांव के रहने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी पहले से ही विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं।

हालांकि बसपा संस्थापक कांशीराम के जमाने में बुंदेलखंड बसपा का गढ़ रहा है। एक समय था, जब मायावती सरकार में यहां से आधा दर्ज मंत्री और डेढ़ दर्जन दर्जा प्राप्त मंत्री हुआ करते थे। लेकिन सपा की अखिलेश सरकार में एक भी विधायक इस लायक नहीं है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए गए गयाचरण दिनकर ने गुरुवार को फोन पर कहा कि ‘बसपा हमेशा बुंदेलखंड और वहां के वाशिंदों की हमदर्द रही है, हमारी सरकार ने तो पृथक बुंदेलखंड राज्य बनाने का प्रस्ताव तक केंद्र सरकार को भेज चुकी है।’

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘सूखाग्रस्त बुंदेलखंड की उपेक्षा राज्य व केंद्र की सरकारें कर रही हैं, इसका खामियाजा अगले विधासभा चुनाव में सपा और भाजपा को भोगना पड़ेगा।’ सपा के बांदा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी का कहना है, “मंत्रिमंडल में शामिल करना मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में है, अगले चुनाव में बुंदेलखंड की सभी उन्नीस सीटें सपा कराए गए विकास कार्यो के दम पर जीतेगी।”

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