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मिसाल : वो गिरती रही संभलती रही और हासिल किया मुकाम

कानपुर। शहर की एक लड़की ने मिसाल कायम की है उन लोगों के लिए जो गरीबी के चलते पढ़ाई नहीं कर पाते। इस लड़की ने ये साबित कर दिया कि अगर यदि हौसला है तो मंजिल खुद ब खुद कदम चूमती है। हम बात कर रहे हैं शहर की बेटी नेहा गांधी की। बचपन में पिता फिर इकलौते भाई की मौत के बाद उसने तमाम परेशानियों का सामना किया। परिवार को भी संभाला लेकिन हार नहीं मानी। अपने हौसले के बल पर ट्यूशन और कोचिंग पढ़ाकर उसने परिवार को संभाला और आज CA (चार्टर्ड एकाउंटेंट) बनकर मिसाल कायम कर दिखायी। शहर के साकेत नगर निवासी टिम्बर मर्चेंट अमरजीत गांधी की बेटी नेहा गांधी का बचपन सुख सुविधाओं वाला रहा। माँ महिंदर कौर और बड़े भाई रमनदीप के साथ पूरा परिवार सुखी था। लेकिन जब नेहा 12 तथा भाई 16 साल का था तभी उनके पिता अमरजीत गांधी की सड़क हादसे में मौत हो गई। परिवार के मुखिया की अचानक मौत और बच्चे छोटे तो मुश्किल खड़ी हो गई। फिर भी भाई ने जैसे तैसे पिता के व्यापार को संभालना शुरू किया तो नेहा ने माँ को।

मिसाल

मिसाल बनी नेहा

भाई ने बीकॉम कर रही नेहा को CA बनने का सपना दिखाया। जिस राह पर वह चल पड़ी। लेकिन कुदरत अभी और मुसीबतें लेकर आने को तैयार थी। 26 वर्ष की उम्र में भाई रमनदीप की भी बीमारी से मौत हो गई। भाई की मौत ने माँ बेटी को तोड़ कर रख दिया। अपनों और सपनों को खो चुकी माँ बेटी के सामने गुजारे की समस्या पैदा हो गई। वहीँ CA की पढ़ाई मुश्किल हो गई। लेकिन भाई के दिखाए सपने को पूरा करने को लेकर नेहा एक बार फिर उठ खड़ी हुई। ट्यूशन और कोचिंग कर पढ़ाई और माँ व भाई की एक साल की बेटी को संभाला। किसी प्रकार से खाना, कपड़े का इंतजाम किया। और साथ ही वक्‍त मिलने पर देर रात अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। आखिरकार दिन रात मेहनत कर वह आज CA बन गई। कानपुर का CA का रिजल्ट एक फीसदी होने के बावजूद वह चार्टर्ड एकाउंटेंट बन गई।

एक मिसाल और पेश की

भाई रमनदीप की मौत के बाद नेहा ने भाभी की दूसरी शादी भी कराई। जबकि उनकी एक साल की बेटी को खुद पालने जा निर्णय लिया। जिसे वह माँ और बाप का प्यार देकर पाल रही है। शहर की इस इस बेटी के संघर्ष की कहानी जान कर किसे गर्व नहीं होगा।

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