मुंबई में हुआ था देश का पहला एनकाउंटर? क्या कहते हैं पुलिस रिकॉर्ड

आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे मारा गया है. बताया जा रहा है कि कानपुर टोल नाके से 25 किलोमीटर दूर विकास दुबे को ला रही कार पलट गई थी. इस दौरान विकास दुबे ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की. इसी दौरान  पुलिस एनकाउंटर में विकास दुबे की मौत हो गई है.  अगर पुलिस रिकॉर्ड की बात करें तो कहा जाता है कि देश में पहला एनकाउंटर करने का श्रेय मुंबई पुलिस को जाता है. आइए जानते हैं कब और कौन था वो माफिया जिसे मुंबई पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था.

आंकड़े बताते हैं कि मुंबई में बढ़ते गैंग वार और अंडरवर्ल्ड के अपराधों को देखते हुए 1980 के दशक में मुंबई पुलिस डिटेक्शन यूनिट बनाई गई. जिसे प्रचलि‍त शब्दों में एनकाउंटर स्कवैड कहा जाता था. ये यूनिट डी कंपनी, अरुन गवाली और अमर नाइक गैंग पर श‍िकंजा कसने के लिए बनाई गई थी.

मुंबई पुलिस की इसी यूनिट की टीम पर 11 जनवरी 1982 को मुंबई के पहले एनकाउंटर का श्रेय जाता है. बता दें कि इसे ही देश का पहला एनकाउंटर भी कहा जाता है. ये एनकाउंटर मुंबई के वडाला कॉलेज में हुआ था. जब स्पेशल टीम ने गैंगस्टर मान्या सुर्वे को छह गोलियां मारी थीं. कहा जाता है कि देश को आजादी मिलने के बाद ये पहला एनकाउंटर था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी. इस पर फिल्म भी बनी थी.

फिर ‘पुलिस एनकाउंटर’ शब्द का इस्तेमाल 1984 और 1995 के बीच पंजाब विद्रोह के दौरान किया गया. इस दौरान, पंजाब के पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय समाचार पत्रों और मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों को ‘मुठभेड़ों’ की सूचना दी. फिर इस तरह विभ‍िन्न राज्यों से एनकाउंटर की खबरें आम प्रचलन में आने लगीं.

साल 2002 से 2006 के बीच गुजरात में भी कई एनकाउंटर चर्चा में रहे. इनमें कई पुलिस एनकाउंटर काफी विवादित रहे. इनमें तुलसीराम प्रजा‍पति, इशरत जहां जैसे केस भी सामने आए. बता दें कि एनकाउंटर किल‍िंग भारत और पाकिस्तान में 20 वीं सदी के उत्तरार्ध के बाद ही प्रचलित हुआ.

एनकाउंटर यानी मुठभेड़ का इस्तेमाल पुलिस या सशस्त्र बल तब करती है जब कोई माफिया या गैंगस्टर कथित आत्मघाती बनकर पुलिस बल या अन्य पर अटैक कर देता है. ऐसे में पुलिस आत्मरक्षा यानी सेल्फ डिफेंस में संदिग्ध बदमाशों या आतंकवादियों से मुठभेड़ करती है.

1980 के दशक में महाराष्ट्र में एनकाउंटर की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, जब पुलिस ने गैंग वार और अंडरवर्ल्ड से निपटने के लिए इस तरह की मुठभेड़ की. उस दौरान मुंबई पुलिस के कई अफसर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पहचाने जाने लगे थे.

अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां कई सामाजिक संगठन बीते सालों में फेक एनकाउंटर्स पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल चुके हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 2 जुलाई 2018 को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था. इससे पहले राष्ट्रीय मानवाध‍िकार आयोग भी राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चुका था. बता दें कि कोर्ट में दी गई याचिका में कहा गया था कि बीते सालों में यूपी में 500 मुठभेड़ हुईं, जिसमें 58 मौतें हुईं.

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