यूपी में अग्निकांड पीड़ितों को ई-पेमेंट से मिलेगा मुआवजा

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लखनऊ। यूपी के राहत आयुक्त ने अग्निकांड पीड़ितों को सहायता राशि देने में आ रही कठिनाइयों के संबंध में सभी जिलाधिकारियों को कड़ाई से अनुपालन के आदेश दिए हैं। यह आदेश गोंडा जिलाधिकारी के पत्र पर संज्ञान लेते हुए जारी किया गया है। जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने बताया कि दरअसल अग्निकांड के पीड़ितों को उनकी पासबुक व बैंक संबंधी अन्य आवश्यक कागजात जल जाने के कारण सहायता राशि देने में कठिनाई आ रही थी।

 मुआवजा

उन्होंने बताया कि कई पीड़ितों को कागजात न होने के कारण सहायता नहीं मिल पाई थी। ऐसे में उन्होंने पीड़ितों की इस गंभीर समस्या के संबंध में राहत आयुक्त को पत्र के माध्यम से अवगत कराया। राहत आयुक्त ने अब पूरे प्रदेश में शासनादेश जारी किया है, जिसमें पीड़ित के खाते में सहायता राशि कोषागार से सीधे पीड़ित के खाते में ई-पेमेंट के जरिए ट्रांसफर कर दी जाएगी।

मुआवजा वापसी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के बदले में दिया गया मुआवजा वापस करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिका की सुनवाई करते हुए इस मामले में उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने किसानों की जमीन अवासीय दर से बैनामा करवाया उसके बाद उसी दर से मुआवजा की भुगतान की गई। बाद में सरकार की तरफ से यहा कहा गया कि यह जमीन कृषि की है और अवासीय दर से मुआवजा लिया गया है। कृषि और अवासीय जमीन के बीच का अंतर किसानों से वसूली की बात की जाने लगी।

किसानों से मुआवजा वसूलने के लिए जिलाधिकारी की तरफ से नोटिस भी जारी कर दी गई, जिससे आहत किसानों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। फिरोजाबाद के जिलाधिकारी ने गत 7 मार्च को नोटिस जारी कर शेष मुआवजा वापस करने को कहा। सरकार के इस फैसले के खिलाफ अरविंद कुमार और कुछ किसानों ने मिलकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। किसानों की इस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति वी.के मिश्रा की खण्डपीठ ने सुनवाई करते हुए किया।

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