बहादुर बेटी ने पिता को दी मुखाग्नि, पूरी की अंतिम इच्छा

0

कानपुर। बेटा कुल का दीपक होता है व बेटे के बिना चिता को अग्नि कौन देगा ये बातें अब बीते जमाने की हो गई हैं। कानपुर में ऐसी ही रूढि़यां उस समय टूटती नजर आई जब बेटी ने पिता की चिता को न सिर्फ मुखाग्नि दी बल्कि अंतिम संस्कार की हर वे रस्में निभाई, जिनकी कल्पना कभी एक पुत्र से की जाती थीं।

मुखाग्नि

बनाना चाहते थे बैंक अधिकारी

मन्नीपुरवा में रहने वाले राज कुमार की लम्बी बीमारी के दौरान मौत हो गई। शव का अतिंम संस्कार करने के लिए परिजन भैरवघाट ले गए। साथ ही स्व राज कुमार की एक इकलौती पुत्री मंजली को भी घाट पर ले जाया गया। मंजली ग्रेजुएट है और बैंक की तैयारी कर रही है। स्व राज कुमार बैंक ऑफ इंडिया में कैशियर के पद पर कार्यरत थे। वो अपनी बेटी को बेटा मानते थे। पिता अपने पड़ोस के लोगो से कहते थे कि मेरी बेटी बेटे से बढ़कर है। वे मंजली को बैंक की तैयारी कराकर बैंक का अधिकारी बनाना चाहते थे।

बिमारी से थे पीड़ित

कई महिनों से राज कुमार लीवर में समस्या होने के कारण बिमार चल रहे थे। बीती सुबह राज कुमार ने अपना शरीर त्याग दिया और अंतिम इच्छानुसार उनका दाह सस्कार उनके पैतृक निवास मन्नीपुरवा से किया गया। पुत्री ने मुखाग्नि देकर अपने पिता की अंतिम इच्छा को पूरा किया। इस दौरान सभी ने मंजली के साहस की सराहना की।

loading...
शेयर करें