#UPElection2017 : ओवैसी की एंट्री से बिगड़ गया सपा-कांग्रेस गठबंधन का खेल, फायदे में भाजपा

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लखनऊ(संदीप शर्मा): मुस्लिम वोटबैंक को उत्तर प्रदेश चुनाव का एक बहुत निर्णायक अंग माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को हासिल हुए पूर्ण बहुमत भी मुस्लिम वोटबैंक का बहुत बड़ा योगदान रहा था। लेकिन इस बार मंजर कुछ साफ़ नजर नहीं आ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण हैं हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी जो इस बार सूबे की राजनीति में एंट्री कर मुस्लिम वोटबैंक का खेल बिगाड़ सकते हैं। लेकिन उनकी एंट्री को भारतीय जनता पार्टी का फायदा भी माना जा रहा है

मुस्लिम वोटबैंक

मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाने के लिए ओवैसी की एंट्री 

वैसे तो इस बार चुनाव में कौमी एकता दल सहित कई छोटे मुस्लिम दलों और आजम खान, अतीक अहमद और अंसारी बंधुओं जैसे दिग्गज मुस्लिम नेताओं के शिरकत ने स्थिति रोचक बना रखी है लेकिन ओवैसी की एंट्री ने इस राजनीतिक रोचकता में चार चांद लगा दिया है।

एआईएमआईएम पार्टी के मुखिया ओवैसी ने सूबे के इस चुनाव में कदम रखते ही कई राजनीतिक दलों के माथे पर पसीना ला दिया है। उनकी इस एंट्री से सबसे ज्यादा नुकसान सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का माना जा रहा है। क्योंकि विवादित ढांचा बाबरी काण्ड के बाद से सपा को ही मुस्लिम वोटबैंक का प्रबल दावेदार माना जाता रहा था। वहीं कांग्रेस के साथ गठबंधन के बार से यह प्रबलता दोगुनी होती दिखाई दे रही थी लेकिन अब राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदलते नजर आ रहे हैं।

साथ ही कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ ओवैसी की एंट्री को भाजपा के लिए फायदे के रूप मर में देख रही है। जानकारों का कहना है कि ओवैसी के आगमन से मुस्लिम वोटबैंक किसी एक दल के खाते में न जाकर आपस में बंट जायेंगे जिस फायदा कहीं न कहीं भाजपा को होगा ।

यूपी की राजनीति में पहली बार शामिल हो रहे ओवैसी ने पिछले साल से ही अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। पिछले साल उनके द्वारा की गई कुछ जनसभाओं में उमड़ी भीड़ ने यह बता दिया था कि वे राज्य की राजनीति में एक बड़ा रोल अदा करने वाले हैं। शायद यही वजह थी कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश में उनकी एंट्री पर रोक लगाना पड़ा था।

लेकिन अब करीब छह महीने बाद चुनाव के समय में ओवैसी ने कुछ जनसभाएं कर अपनी वही ताकत फिर दिखाना शुरू कर दिया है। बीते दिनों आगरा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने सपा और बसपा पर हमला भी बोला था।

बताया जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव में 36 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। बीते दिनों ओवैसी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। इसके अलावा सुल्तानपुर, बाराबंकी, लखनऊ सहित कुछ अन्य जगहों पर भी ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार अपनी ताल ठोकते नजर आ रहे हैं

उत्तर प्रदेश के कैराना क्षेत्र से अपने इस चुनावी सफ़र की शुरुआत करने वाले ओवैसी इस चुनाव में कितनी सीटों पर कब्ज़ा कर पाएंगे यह तो चुनाव के नतीजे ही बतायेंगे लेकिन पार्टी की एंट्री से सपा-कांग्रेस गठबंधन, बसपा सहित कई पार्टियों के आला नेताओं के माथे पर बल जरूर पैदा कर दिया है।

 

 

 

 

 

 

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