दक्षिण कोरियाई लेखिका को मिला मैन बुकर प्राइज 2016

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लंदन। मैन ग्रुप की ओर से दिया जाने वाला मैन बुकर प्राइज 2016 इस बार दक्षिण कोरियाई लेखिका हान कांग को दिय गया है। हान कांग को उनके ‘द वेजे‍टेरियन’ उपन्‍यास के लिए मिला है।

मैन बुकर प्राइज 2016

मैन बुकर प्राइज 2016 में कई महान उपन्‍यासकार हुए शामिल

मैन बुकर प्राइज 2016 की दौड़ में कई महान लेखक शामिल थे। लेकिन हान कांग ने इन सभी को पीछे छोड़ दिया। हान कांग का द वेजेटेरियन उपन्‍यास एक महिला द्वारा मानवीय निर्ममता को खारिज करने और मांस का सेवन छोड़ देने पर आधारित है।

नोबेल पुरस्‍कार पाने वाले लोग भी हुए शामिल

मैन बुकर प्राइज 2016 की दौड़ में जिन लेखकों को पीछे छोड़ा है, उनमें नोबल पुरस्कार प्राप्त ओरहान पामुक और अंतरराष्ट्रीय बेस्ट सेलर एलेना फेरांटे शामिल हैं। हान कांग ने 50 हजार पाउंड का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता और उन्होंने इसे उपन्यास की अनुवादक डेबोरा स्मिथ के साथ साझा किया।

155 किताबों में से हुआ चयन

पोर्टबेलो बुक्स द्वारा प्रकाशित ‘द वेजिटेरियन’ को पांच जजों के एक पैनल ने 155 किताबों में से सर्वसम्मति के साथ चुना था। इस पैनल की अध्यक्षता जाने-माने आलोचक और संपादक बॉएड टोंकिंग ने की। सोल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स में रचनात्मक लेखन पढ़ाने वाली 45 वर्षीय कांग दक्षिण कोरिया में पहले ही मशहूर हैं और वह यी सांग लिटरेरी प्राइज, टुडेज यंग आर्टिस्ट अवॉर्ड और कोरियन लिटरेचर नोवल अवॉर्ड जीत चुकी हैं।

पहला उपन्‍यास है हान कांग का

‘द वेजिटेरियन’ हान कांग का पहला उपन्यास है, जिसे 28 वर्षीय स्मिथ ने अंग्रेजी में अनुवाद किया है। स्मिथ ने 21 साल की उम्र से कोरियन सीखनी शुरू की थी। अब वह कांग के साथ 50 हजार पाउंड के पुरस्कार में हिस्सेदार हैं।

सर्वसम्मति से किया गया चुनाव

बॉएड टोंकिंग ने कहा कि विविधता और विभिन्नता से भरी एक लंबी सूची के हमारे चयन के बाद प्रथम श्रेणी के अनुवाद वाले छह अदभुत उपन्यासों शॉर्टलिस्ट किया गया। जजों ने सर्वसम्मति के साथ द वेजिटेरियन को विजेता चुना है।  अनुवाद में उत्कृष्ट वैश्विक काल्पनिक लेखन के तहत मैन बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार में लेखक और अनुवादक दोनों को 25-25 हजार पाउंड और नए डिजाइन वाली ट्रॉफी मिलती है।

कोई भारतीय नहीं हुआ शामिल

उन्हें शॉर्टलिस्ट होने के लिए एक-एक हजार पाउंड अतिरिक्त भी मिले हैं। इस साल इस पुरस्कार की दौड़ में कोई भारतीय लेखक नहीं है।

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