मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर सर्वे में आए चौंकाने वाले नतीजे

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नई दिल्ली। मोदी सरकार के 2 साल पूरे होने के मौके पर ऑन लाइन पोर्टल लोकल सर्किल डॉट कॉम ने एक सर्वे किया है। सर्वे के नतीजे कई मामलों में चौंकाने वाले साबित हुए हैं। मोदी सरकार के 2 साल के सर्वे में 24 फीसदी महिलाएं जबकि 76 फीसदी पुरुषों ने हिस्सा लिया है। सर्वे में शहरी और ग्रामीण इलाकों के लोगों के साथ ही हर उम्र के लोगों को शामिल किया गया है।

मोदी सरकार के 2 साल के सर्वे

मोदी सरकार के 2 साल के सर्वे में 46 % लोगों ने किया पास

बता दें कि लोकल सर्किल से देशभर में करीब 10 लाख लोग जुड़े हुए हैं। मोदी सरकार के 2 साल के सर्वे में 46 फीसदी लोगों ने माना कि कुल मिलाकर सरकार अपने 2 साल के कामकाज में खरी उतरी है, जबकि 18% लोगों ने इसे उम्मीद से ज्यादा बताया तो 36% ने उम्मीद से कम।

उम्मीद पर खरे – 46%

उम्मीद से ज्यादा – 18%

उम्मीद से कम – 36 %

बेरोजगारी दर के सवाल पर 35% लोगों ने माना कि सरकार की कोशिशों की वजह से इसमें कमी आई है, जबकि 43 फीसदी ने माना कि बेरोजगारी दर में कोई कमी नहीं आई है, जबकि 22% ने कोई राय नहीं रखी

सवाल : क्या सरकार की कोशिशों से बेरोजगारी दर में कमी आई है ?

हां- 35 %

नहीं- 43 %

कह नहीं सकते- 22%

लोकल सर्किल के मोदी सरकार के 2 साल के सर्वे में 38% लोगों ने माना कि रोजमर्रा की जरूरतों और जीवन यापन के लिए जरूरी खर्च में कमी आई है, जबकि 55 फीसदी ने जरूरी खर्च में कमी से इनकार किया। सर्वे में 67% लोगों ने माना कि सरकार के स्वच्छ भारत अभियान से साफ-सफाई बढ़ी है, जबकि 28 फीसदी ने इससे इनकार किया।

वहीं 61% लोगों ने माना कि सरकार की कोशिशों से 2 साल में भ्रष्टाचार कम हुआ है, जबकि 32 % लोगों ने भष्टाचार में कमी से इनकार किया। वहीं 38% लोगों ने माना कि बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराध में कमी आई है। जबकि 40% ने इससे इनकार किया है। बिजली पानी के सवाल पर 56% ने माना कि इसमें सुधार हुआ है जबकि 34% ने सुधार की बात से इनकार किया।

सवाल : क्या आपके सांसद क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं ?

हां-18%

नहीं-66%

कह नहीं सकते-16%

सवाल : क्या केंद्रीय मंत्री जनता की जरूरतों का ध्यान रख रहे हैं ?

हां-36%

नहीं-48%

कह नहीं सकते-16%

सवाल : क्या सरकार की कोशिशों से कारोबार करना आसान हुआ है ?

हां-60%

नहीं-23%

कह नहीं सकते-17%

वहीं जीएसटी बिल पर 61% लोगों ने माना कि बिल पास कराने और लागू कराने की सरकार ने पूरी कोशिश की जबकि 30 फीसदी लोगों ने सरकार की कोशिशों को नाकाफी बताया।  लोकल सर्किल के इस सर्वे में बीते 2 साल में सरकार की सबसे बेहतरीन मुहिम के तौर पर खाते में सब्सिडी को- 46%, जन धन योजना को 22%, मेक इन इंडिया-16% और स्वच्छ भारत को 16 %लोगों ने चुना।

मोदी सरकार के 2 साल के सर्वे के दौरान पूछे गए सवाल में 90% लोगों ने माना कि देश की छवि और दबदबा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा है, जबकि 8 फीसदी इससे सहमत नहीं दिखे। साथ ही 34 फीसदी ने माना कि पाकिस्तान के साथ देश के रिश्तों में सुधार आया है, जबकि 51 फीसदी लोगों ने इससे असहमति जताई।

एक और सवाल के जवाब में 72 फीसदी लोगों ने माना कि सरकार के 2 साल के दौरान आतंकी हमलों और गतिविधियों में कमी आई है, जबकि 21 फीसदी ने इससे इनकार किया।

लोकल सर्किल के सर्वे के दौरान लोगों से पूछा गया कि क्या सरकार सांप्रदायिक मामलों से प्रभावी ढंग से निपट सकी? जिसके जवाब में 63% लोगों ने सहमति जताई जबकि 31% लोग इससे असहमत दिखे। सर्वे के दौरान लोगों से पूछा गया कि क्या आप देश में अपने और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित पाते हैं ? जिसमें 76 फीसदी लोगों ने कहां हां जबकि 15% लोगों नहीं में जवाब दिया।

लोगों से पूछा गया कि क्या सड़क, सिंचाई और दूरसंचार सुविधा में बढ़ोत्तरी देखने को मिली ?

हां-72%

नहीं-20%

कह नहीं सकते-8%

लोगों से पूछा गया कि क्या जनता के जीवन स्तर में सुधार के लिए अगले 3 साल में सरकार को एक काम जो करना चाहिए ?

अहम अभियान को जिलों तक ले जाएं  20 %

निवेश बढ़े और रोजगार बढ़े  35 %

सरकारी महकमों में बिचौलियों का खात्मा- 15%

अफसरों के कामकाज में सुधार – 30 %

मोदी सरकार के 2 साल पूरे होने के मौके पर instavaani  ने भी सर्वे किया है जिसमें 10,897 लोग शामिल हुए। instavaani के इस सर्वे में 59%लोगों ने माना कि उनकी आर्थिक स्थिति 2 साल पहले के मुकाबले बेहतर हुई है, जबकि 41 फीसदी इससे सहमत नहीं दिखे।

instavaani सर्वे में 68% लोगों ने माना कि 2 साल पहले के मुकाबले आज अभिव्यक्ति की आजादी ज्यादा है, जबकि 32% इससे इनकार किया। सर्वे में 82 फीसदी ने माना कि बीते 2 साल में दुनिया में देश की छवि बेहतर हुई है ? जबकि 18 फीसदी लोगों ने इसपर असहमति जताई। वहीं भ्रष्टाचार के सवाल पर 62 % ने माना कि बीते 2 साल में भ्रष्टाचार कम हुआ है जबकि 38 % ने इससे इनकार किया।

 

(IBN 7 से साभार)

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