बेधड़क रख कर भूल जाइये स्‍मार्टफोन, कोई नहीं चुराएगा, जानिए क्‍यों

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नई दिल्‍ली। केंद्र की मोदी सरकार ने मोबाइल चोरी को रोकने के लिए एक नया तरीका लेकर आई है। केंद्र सरकार का कहना है ऐसी योजना बन रही है जिससे मोबाइल चोरी करना इतिहास बन जाएगा। सरकार ने कहा है कि मोबाइल चुराने वालों को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। सरकार की नई योजना से चुराए गए या गायब हुए मोबाइल फोन पर सभी सेवाओं को रोक दिया जाएगा। यह व्यवस्था सिम हटाने या आईएमईआई संख्या बदलने पर भी सभी नेटवर्क पर काम करेगी।

मोबाइल चोरी

मोबाइल चोरी को लेकर बीएसएनएल हुई सतर्क

सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल को इस नई प्रणाली सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) के लिए सॉफ्टवेयर तथा क्रियान्‍वयन के तौर-तरीके के विकास की जिम्मेदारी दी गई थी और कंपनी को अपने पुणे केंद्र से महाराष्ट्र में छह महीने तक इसका पायलट आधार पर परीक्षण करना है। एक आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि सीईआईआर का मकसद नकली मोबाइल फोन की संख्या में कमी लाना तथा चोरी को हतोत्साहित करना है। इससे ग्राहकों के हितों की रक्षा होने के साथ कानूनी रूप से आवाज पकड़ने (इंटरसेप्शन) को लेकर जांच एजेंसियों के लिए रास्ता सुगम होगा।

कैसे करेगी यह काम

दूरसंचार विभाग की योजना के अनुसार सीईआईआर प्रणाली आईएमईआई डाटाबेस को सभी मोबाइल ऑपरेटरों के साथ जोड़ेगी। दस्तावेज के अनुसार सीईआईआर काली सूची में डाले गए मोबाइल सेट को सभी नेटवर्क ऑपरेटरों के बीच साझा करने के लिए केंद्रीय प्रणाली के रूप में काम करता है ताकि उक्त श्रेणी में एक नेटवर्क में रखे गए उपकरण दूसरे में काम नहीं करें। यह स्थिति तब भी होगी जब सिम कार्ड बदल दिया जाए।  आईएमईआई 15 अंकों की संख्या है, जो वैश्विक उद्योग संगठन जीएसएमए आवंटित करता है।

मोबाइल फोन चोरी से राष्‍ट्रीय सुरक्षा को खतरा

दस्तावेज में कहा गया है, मोबाइल फोन की चोरी केवल वित्‍तीय नुकसान नहीं है बल्कि नागरिकों के व्यक्तिगत जीवन के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा है। गायब हुए, चुराए गए या नकली हैंडसेट के आईएमईआई को सीईआईआर की सूचना दी जाएगी। दूरसंचार विभाग ने वैसे तो दूरसंचार परिचालकों को फर्जी आईएमईआई संख्या वाले मोबाइल फोन को सेवा उपलब्ध कराने से मना किया है।लेकिन कंपनियों को नकली आईएमईआई संख्या वाले हैंडसेट की पहचान में दिक्कत आती है।

तीन साल को हो सकती है जेल

सीईआईआर परिचालकों को फर्जी आईएमईआई संख्या वाले हैंडसेट की पहचान में भी मदद करेगा। दूरसंचार विभाग नियमों को भी अधिसूचित करने की तैयारी में है, जिसमें आईएमईआई संख्या में छेड़छाड़ दंडनीय अपराध होगा। इसमें तीन साल तक की जेल हो सकती है।

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