मोहिनी ने हजारों लड़कियों को बनाया हुनरमंद

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मोहिनीकौशांबी। अपनी मेहनत के दम पर इंसान जो चाहे वह हासिल कर सकता है इस लाइन को चरितार्थ कर दिखाया कौशाम्बी जिले के इस बेटी ने। गरीबी दूर करने के लिए मोहिनी नाम की इस लड़की ने बेरोजगारी को अपनी मेहनत से मात दे दी। मोहिनी ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अपनी गरीबी दूर करने के साथ-साथ जिले के कई बेटियों को हुनरमंद बनाकर रोजगार उपलब्ध कराया। अपनी मेहनत के दम पर दुनिया के सामने मिसाल पेश कर रोजगार ढूंढ रहे लोगों की जिंदगी रोशनी से भर कर उनके बीच मसीहा के रूप में खुद को स्थापित कर ली।

मोहिनी ने हुनर का लिया सहारा

कौशांबी जिले के मंझनपुर तहसील के कादीपुर गांव की रहने वाली मोहिनी मिश्रा ने एम.ए. की डिग्री लेने के बाद अपने जीवन में कुछ कर गुजरने की ठान ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद खुद सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर की ट्रेनिंग ली। उसने घर में ही आस-पड़ोस की महिलाओं और लड़कियों को सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। प्रशिक्षण के बाद कुछ लड़कियों को प्रशिक्षण देने के साथ अपने साथ रख लिया। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता चला गया।

मोहिनीमहिलाओं एवं लड़कियों को बनाया आत्मनिर्भर

इनके इस काम की चर्चा पूरे जिले में होने लगी। दूरदराज से भी लड़कियां प्रशिक्षण के लिए आने लगीं।  आज इनके प्रशिक्षण की बदौलत जिले की करीब एक हजार से ज्यादा लड़कियां और महिलाएं प्रशिक्षण पाकर अपने  पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं। मोहिनी ने जो राह दिखाई है, उस पर कई परिवारों में खुशियां पहुंच गई हैं। ये लड़कियां कौशांबी जैसे अति पिछड़े जिले में अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटाने का काम कर रही हैं।

मोहिनी ने दस लड़कियों से की थी शुरूआत

अपने मिशन की शुरूआत में मोहिनी ने करीब 10 लड़कियों को सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर की ट्रेनिंग दी। फिर धीरे-धीरे ये संख्या बढऩे लगी। हजारों को स्वावलम्बी बनाने के बाद 1000 से ज्यादा लड़कियां और महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की राह पर आगे बढ़ रही हैं।

विकास संस्थान बना सहयोगी

मोहिनी की इस पहल में जिले में सक्रिय बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान मददगार साबित हुआ। अपने कार्यों की बदौलत साल 2010 में वे इसी संस्थान में मास्टर ट्रेनर बन गईं। मोहनी मिश्रा अब बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान में बतौर प्रशिक्षिका कार्य कर रही हैं।

ओपी सिंह परिहार

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