मौनी अमावस्या पर हर-हर गंगे के जयकारों से गूंजा तट

0

देहरादून। उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है। आज मौनी अमावस्या है। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त गंगा में डुबकी लगाए इस दिन की मान्यता है कि स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। साथ ही स्नान के बाद आस्था के साथ अपनी क्षमता के मुताबिक गरीबों में दान किया जाता है। इससे लाभ मिलता है।

मौनी अमावस्या

मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद दें दान

माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या कहते हैं। यह योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा में देवताओं का निवास होता है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। जिसके चलते शुक्रवार को भोर से पुण्य काल में शुरू हुए शुभ मुहूर्त में दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने धर्मनगरी की हृदयस्थली हरकी पैड़ी पर गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।

हर-हर गंगे के जयकारों से गूंजा तट

इस मौके पर भोर से ही गंगा के समस्त घाटों और तटों पर हर-हर गंगे के जयकारों के साथ लोगों ने गंगा में गोते लगाकर माँ गंगा से पापों से मुक्ति दिलाने की कामना की। स्नान के बाद श्रद्धालुजनों ने दूध, दही, घृत, शक्कर, शहद, अक्षत, सुगंध, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य समर्पित कर विधिवत पतित पावनी मां गंगा का पूजन अर्चन कर उनकी आरती उतारी।

साथ ही उनसे घर परिवार में सुख और समृद्धि की कामना की। हरकी पैड़ी सहित सुभाष घाट, शिव घाट, गोविन्द घाट, सर्वानंद घाट, प्रेमनगर घाट के अलावा गंगा के तमाम तटों पर भी स्नानार्थियों की खासी भीड़ रही।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मौनी अमावस्या ही कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने से लोगों के कोटि-कोटि जन्मों के जहां पाप कट जाते हैं। साथ ही सुख और समृद्धि घर आती है। धर्मनगरी में मौनी अमावस्या के स्नान का क्रम देरशाम तक जारी रहेगा। स्नान को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए हैं।

बता दें कि कहा जाता है कि यहां पर स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं क्योंकि यहां देवताओं का वास है। 

loading...
शेयर करें