महंगे से महंंगा प्रयास भी यमुना को साफ़ नहीं कर सकता

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इंटरनेशनल मैगज़ीन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि महंगे से महँगा प्रयास भी यमुना को साफ़ करने के लिए बेकार है। पानी किसी काम में प्रयोग के लिए सुरक्षित नहीं है।यमुना के पानी को स्वच्छ करने के लिए सरकार भी पूरा प्रयत्न कर रही हैं। लेकिन इसको साफ़ रखने का कोई तरीका नहीं मिल पा रहा हैं।

यमुना

यमुना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बेअसर

इस मैगज़ीन में जो रिपोर्ट जारी कीगई है उसके मुताबिक जो भी जल उपचार के लिए प्लांट लगे है वह सब भी बेअसर है। यमुना के गंदे पानी का स्तर बहुत ज्यादा है। लम्बे समय से पानी को साफ़ करने के लिए जो भी प्रक्रिया अपनाई जा रही है वो पूरी तरह से सॉलिड वेस्ट को पानी से निकलने में सक्षम नहीं है।

शोधकर्ताओं ने अलग-अलग क्षेत्रों से पानी के सैंपल को लेकर टेस्ट किया। इन्होंने पानी के सैंपल दिल्ली के निजामुद्दीन पुल और ओखला बेरिज के अलावा और भी क्षेत्रों से जमा किया।

दूषित पानी का सिंचाई के लिए भी होता है उपयोग

इस बात का भी पता चला है की यह दूषित पानी आगरा कैनाल के जरिये 638 गांवो तक पहुंचता है। इसी पानी को लोग खेती किसानी में प्रयोग करते है। एमिटी यूनिवर्सिटी नॉएडा एप्लाइड केमिस्ट्री विभाग के आर.एस दुबे कहते है कि  इस शोध के समय हमें हर पानी के सैंपल को एक दूसरे से भिन्न देखा।

 

शोध क्या कहता है

  • जल प्रदूषण का जो स्तर है वह प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों द्वारा निर्धारित किये गए स्तर से कही ज्यादा अधिक है।
  • पानी दिल्ली के वजीराबाद बेराज तक तो साफ़ है लेकिन उसके बाद दूषित हो जाता है।
  • शोध में यमुना से जुडी भू-जल प्रदूषण की भी जानकारी मिली है।
  • शोधकर्ता ने शिफारिश की है की इंडस्ट्रीज और अनुपचारित सीवेज गंदगी की जांच की जाये।                      

 

 

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