यहां के लोग नहीं बंधवाते राखी, रक्षाबंधन के दिन चलाते हैं ईंटे-पत्थर

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देहरादून। रक्षा बंधन का इंतजार हर बहन करती है। इस त्यौहार में बहन अपने भाई को राखी बांधती है, लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा गांव है जहां बहन अपने भाई को राखी नहीं बांधती बल्कि इस दिन इस गांव में लोग चार समूह में बटकर एक दूसरे से लड़ाई करते हैं। दरअसल, उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में एक बहुत पुरानी परंपरा है, जिसके अनुसार, यहां के लोग रक्षा बंधन वाले दिन एक दूसरे से लड़ाई करते हैं।

रक्षा बंधन

रक्षा बंधन के दिन लगता है मेला

जो चार समूह होते हैं उन्हें यहां के स्थानीय लोग खाम कहते हैं। यही नहीं, इन चारो दलों के नाम भी रखे गए हैं और इन दलों के नाम कुछ इस प्रकार हैं- चम्याल खाम, बालिक खाम, लमगडिया खाम व गड़हवाल। वहीं, इस पूरी परंपरा को यहां बग्वाल कहा जाता है।

बग्वाल में ये चारो दल पत्थर से एक दूसरे पर वार करते हैं जिसने रोकने के लिए लोग बांस के बने फर्रो का इस्तेमाल करते हैं। इस युद्ध में कई लोग घायल भी होते हैं लेकिन फिर भी सब बग्वाल को आनंद के साथ खेलते हैं। जिस दिन रक्षा बंधन होता है उसी दिन बग्वाल भी खेला जाता है।

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यहां उस दिन मेला भी लगता है जिसे देखने के लिए कई लोग दूर-दूर से आते हैं। यहां तक तो कई लोग बाहर से बग्वाल भी देखने आते हैं क्योंकि ऐसी रीत सिर्फ कमाऊं में होती। इसे देखने में बड़ा आनंद आता है लेकिन इससे कई लोग घायल भी होते हैं क्योंकि इसमें  पत्थरों को अस्त्र बनाया जाता है।

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