यादव सिंह ने कपिल देव को तोहफे में दे दी 32 करोड़ की कंपनी

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यादव सिंह कपिल देव गठजोड़ का खुलासा हो गया है। यह खुलासा उस समय हुआ जब इनकम टैक्स विभाग ने सेक्शन 148 के तहत कपिल देव को नोटिस थमाया। उन्होंने (कपिल देव) और उनकी पत्नी रोमी देव ने यादव सिंह ग्रुप की एक 32 करोड़ की कंपनी कौड़ियों के मोल मात्र छह करोड़ में खरीदी थी। यह सनसनीखेज खबर एक प्रमुख टीवी चैनल ने दी है। आयकर विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि यादव सिंह ने कपिल देव को तोहफे में यह कंपनी क्यों दी।

यादव सिंह कपिल देव

एबीपी न्यूज को पड़ताल करने पर पता चला है कि यादव सिंह की काली कमाई का पैसा यादव सिंह ग्रुप समेत कुल तीन ग्रुपों में लगा था। जिसमें एक ग्रुप में यादव सिंह और उनकी पत्नी कुसुमलता हैं। दूसरे ग्रुप में मैकान्स ग्रुप के मालिक राजेन्द्र मिनोचा, राजेन्द्र मिनोचा और उनकी पत्नी नम्रता मिनोचा हैं। तीसरा ग्रुप है मीनू क्रियेशन्स जिसके मालिक अनिल पेशावरी और मीनाक्षी पेशावरी हैं। यादव सिंह ग्रुप ने इन बेनामी कंपनियों के जरिये बड़े  पैमाने पर सम्पत्तियां जुटायीं। इन बोगस कंपनियों के जरिये इन सम्पत्तियों को खरीदने के लिए पैसा आया।

यादव सिंह के साथ कपिल देव का नाम कैसे जुड़ा

2008 में यादव सिंह के करीबी राजेश मिनोचा और पत्नी नम्रता मिनोचा ने बिजनेसबे कॉरपोरेट पार्क्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी खरीदी। कंपनी ने नोएडा के सेक्टर 65 में चार करोड साढे चार लाख का एक प्लॉट खरीदा। चार साल बाद साल 2012 में मिनोचा ने अपनी कंपनी के शेयर सुपर मैनेजमेंट एड पोर्ट फोलियो और सिस्मका बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिए।

राजेश मिनोचा ने स्वीकार किया है कि जिन दो कंपनियों के नाम शेयर ट्रांसफर किए गए ये दोनों कंपनियां उन्हीं के परिवार की हैं। एक साल बाद यानि 2013 में ये पूरे शेयर वापस राजेश और नम्रता मिनोचा के पास आ गए।

इसके बाद मिनोचा दंपति ने ये शेयर चार लोगों के नाम पर ट्रांसफर कर दिए। कपिल देव को 1,55,500 शेयर, रोमी देव को 51,500 शेयर, दीपराज सिंह सेठी को 1,03500 शेयर और देवेन्द्रजीत सिंह सेठी के नाम- 103500 शेयर दिए गए।

सवाल यह है कि जब कंपनी की वेल्यू 32 करोड़ थी कपिल देव ने इसे 6 करोड़ में कैसे खरीदा। मिनोचा यह स्वीकार कर चुका है कि दस कंपनियों में तीन ही चल रही थीं।

आयकर विभाग ने पाया कि 438.70 रुपये का शेयर कपिल देव को 138 रुपये के रेट पर बेचा गया। यदि कपिल देव दम्पति अपने शेयर को उसी समय बेचते तो वह 16 करोड़ के बिकते जबकि उन्होंने भुगतान सिर्फ दो करोड़ 70 लाख का किया था। इससे कपिल देव को 13 करोड़ का मुनाफा होता।

आयकर विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि यादव सिंह ने कपिल देव को इतना तगड़ा मुनाफा क्यों करवाया क्या दोनो के बीच कोई समझौता था।

कपिल देव का इस मामले में कहना है कि वह यादव सिंह को नहीं जानते। उन्होंने न उनसे कोई कंपनी खरीदी न बेची। मैने एक कंपनी बैंक से लोन लेकर खरीदी थी। मैने कंपनी से इस्तीफा दे दिया है और मैने और मेरी पत्नी ने शेयर बेच दिये हैं। कंपनी की देनदारी अदा कर दी है।

 

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