अब यूपी के विश्वविद्यालयों में भी फहराया जाएगा तिरंगा

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लखनऊ। केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की तरह ही अब प्रदेश की यूनिवर्सिटी में भी तिरंगा फहराया जाएगा। यूनिवर्सिटी में तिरंगा फहराने के लिए जल्द ही राज्यपाल कुलपतियों का एक सम्मेलन बुलाकर उनसे विचार विमर्श करेंगे। राज्यपाल ने बताया कि चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर का दीक्षान्त समारोह 18 मार्च को होगा जबकि डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ का दीक्षान्त समारोह होने वाला है। श्री नाईक ने बताया कि विश्वविद्यालयों के शैक्षिक कलेण्डर में दीक्षान्त समारोह का महत्वपूर्ण स्थान होता है। राज्य के 25 विश्वविद्यालयों में से 20 के दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो चुके हैं। राज्यपाल सोमवार को मीडिया से मुखातिब थे।

विश्वविद्यालयों में तिरंगा

यूनिवर्सिटी में तिरंगा फहराने के लिए होगी कुलपतियाें की बैठक

यूनिवर्सिटी में तिरंगा फहराने के लिए जल्द ही कुलपतियों की बैठक बुलाई जाएगी। श्री नाईक ने कहा कि तीन विश्वविद्यालयों ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर एवं सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थ नगर नवगठित होने के कारण जिनमें दीक्षान्त समारोह अभी नहीं हो सकता है। इस वर्ष दीक्षान्त समारोह में भारतीय वेशभूषा धारण करना एक अच्छी और सराहनीय पहल रही। जबकि ब्रिटिश काल से दीक्षान्त समारोहों में गाउन और हैट का चलन जारी था जो दासता सूचक था। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोहों में भारतीय एवं आंचलिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए नई वेशभूषा निर्धारित कर धारण की जा रही है।

अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा निर्धारित हैः राम नाईक

राज्यपाल राम नाईक ने कन्हैया प्रकरण पर सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा कि पर इतना जरूर कहा कि विचारों के अभिव्यक्ति की एक सीमा निर्धारित है और सीमा से ऊपर जाने पर उंगलिया उठना स्वाभाविक है। पत्रकार वार्ता के दौरान जब एक सवाल जेएनयू प्रकरण पर उठा तो पहले तो राज्यपाल इससे बचते नजर आये और कहा कि यह मामला उनके क्षेत्र के बाहर का है, फिर बोले छात्र छात्राआें का विश्वविद्यायल मेें अपने विचार व्यक्त करने की आजादी होनी चाहिए लेकिन उसकी एक सीमा तक। उन्होंने एक उदाहरण देकर अपनी बात कही ‘कांटे हाथ में लेकर घूमना आजादी है लेकिन जब कांटा किसी की नाक के ऊपर जाएगा तो सवाल उठेगें ही।’ साथ ही उन्होने आपातकाल के दौरान मीडिया की आजादी पर लगाये गये प्रतिबन्ध को इससे जोड़ते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में वैचारिक गतिविधियां तो होनी चाहिए लेकिन उसके लिए सीमा भी निर्धारित होनी चाहिए।

यूनिवर्सिटी में तिरंगा

 

191 छात्र एवं छात्राओं को मिलेगा चांसलर मेडल

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा कुल 191 छात्र एवं छात्राओं को ‘चान्सलर मेडल‘ प्रदान करने के लिए चयनित किया गया, जिनमें से 62 प्रतिशत (118) पदक पर छात्राओं को दिए गये। प्राविधिक शिक्षा मंे 71 प्रतिशत पदक छात्राओं ने प्राप्त किये, वहीं सामान्य विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा एवं राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में भी छात्राओं द्वारा क्रमशः 65, 65 एवं 63 प्रतिशत पदक प्राप्त किए गए। प्राविधिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा एवं सामान्य विश्वविद्यालयों द्वारा वितरित किये गये रजत पदकों में से छात्राओं द्वारा क्रमशः 81, 70 एवं 72 प्रतिशत पदक हासिल किये गये।

इसी तरह चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं द्वारा 89 प्रतिशत पदक प्राप्त किये गये। इसके अलावा ‘अन्य श्रेणी‘ पदकों में 76 प्रतिशत (193) पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किये गये, जो लगभग तीन चौथाई से अधिक है। यही नहीं 69 दिव्यांग छात्र एवं छात्राओं को भी विभिन्न पदकों से सम्मानित किया गया जिनमें से 33 प्रतिशत (23) पदक प्राप्त करने वाली छात्राएं रही। राज्यपाल ने इस बात पर चिन्ता की कि छात्राओं की उच्च शिक्षा में प्रवेश की दर मात्र 12.70 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थाओं के अभाव में स्थिति ज्यादा दयनीय है। इसलिए छात्राओं की शिक्षा के विकास के लिए सभी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

 

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