रोड शो के साथ ही यूपी कांग्रेस का चुनावी प्लान तैयार

लखनऊ। दिल्‍ली की पूर्व सीएम और यूपी में कांग्रेस की सीएम कैंडीडेट शीला दीक्षित ने रविवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रोड शो किया। शीला के साथ यूपी कांग्रेस के नए अध्यक्ष राज बब्बर, प्रचार समिति के अध्यक्ष संजय सिंह और समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी समेत तमाम नए पदाधिकारियों ने भी रोड शो में भाग लिया।

शीला दीक्षित

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यूपी कांग्रेस की रणनीति

यूपी कांग्रेस की असली चुनौती अगले चरण की है जब पार्टी के ये चेहरे चुनाव प्रचार के लिए प्रदेश भर में कूदेंगे। इसके लिए सुझाव तैयार करके गांधी परिवार को दे दिए गए हैं। लखनऊ से लौटकर नई टीम से चर्चा करने के बाद इस पर फाइनल मुहर लगा दी जाएगी।

अलग-अलग प्रस्तावों पर फैसला लेगा आलाकमान

कांग्रेस यूपी में ब्राह्मण, राजपूत और मुस्लिम के इर्द-गिर्द सियासी किलेबंदी कर रही है। उसी लिहाज से उसने अपनी नई टीम के चेहरे भी चुने हैं। लेकिन चेहरे चुनने के बाद उनका सही इस्तेमाल अब आगे कांग्रेस के लिए चुनौती है।

नहीं होगी राहुल की रैली

ये तो तय माना जा रहा है कि 2007 और 2012 की तरह राहुल गांधी की ताबड़तोड़ रैलियां नहीं होंगी। चुने गए ये नए चेहरे ही कमान संभालेंगे। राहुल, सोनिया और प्रियंका प्रचार में उतरेंगे। लेकिन ये वो सघन प्रचार नहीं होगा। खास ख्याल रखा जायेगा कि हार का ठीकरा गांधी परिवार पर न फूटे और जीत मिली तो सेहरा बंधना लाजिमी ही है।

क्या हैं कांग्रेस का प्रस्ताव-

  1. एक प्रस्ताव है कि, प्रदेश को आठ जोन में बांटा जाए यानी हर जोन में 10 लोकसभा सीटें। फिर उस जोन में जाति-धर्म की जनसंख्या के लिहाज से अपने चेहरों को जनता ले बीच ले जाया जाए। पांच दिन के सभी चेहरों के दौरे के बाद उस जोन में पार्टी की एक रैली की जाए, जिसमें सभी चेहरे एक साथ हों। हर जोन में ये करने के बाद लखनऊ में एक बड़ी रैली की जाये, जिसमें गांधी परिवार भी हिस्सा ले। इस रैली में पार्टी अपनी ताकत दिखाए।
  2. बारिश के मौसम और खेती किसानी का ख्याल भी कांग्रेस के जेहन में है, इसीलिए अगर पहले प्रस्ताव पर फौरन मुहर नहीं लगती तो दूसरा प्रस्ताव भी है। वो है कि, जुलाई के आखिर से कांग्रेस के चेहरे चार दिन के लिए दिल्ली से निकलकर गाजियाबाद से प्रचार की शुरुआत कर दें। सभी चेहरे एक साथ हों, आगे का एक रुट तैयार हो और सभी आगे बढ़ते जाएं। रात का रुकना भी यात्रा के दौरान पड़ने वाली जगहों पर ही हो।
  1. शीला दीक्षित को छोड़ दें तो प्रभारी गुलाम नबी आजाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। उनके अलावा राजबब्बर, संजय सिंह, प्रमोद तिवारी, पीएल पूनिया सभी राज्यसभा सांसद हैं। केंद्र की राजनीति के लिहाज से राज्यसभा का गणित ही कांग्रेस का हथियार है। इसीलिए वो यूपी का कोई भी प्लान फाइनल करने से पहले राज्यसभा की शुरुआती कार्यवाही देखने के बाद ही कोई फाइनल फैसला करना चाहती है। हालांकि,
  2. पहले कांग्रेसी चार्ज करो, फिर जनता को रिचार्ज करो
  3. कांग्रेस की रणनीति यही है कि पहले जगह-जगह कांग्रेस की नयी टीम के जाने से कार्यकर्ताओं में ऊर्जा आएगी, पार्टी की गंभीरता देखकर वो भी गंभीरता से जुटेगा। फिर कांग्रेस की बात वो जनता तक पहुंचाएगा। तब कहीं जाकर प्रदेश में कांग्रेस की चर्चा शुरू हो पायेगी।

राज बब्‍बर ने मोदी को कहा तालीबाज 

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि यूपी से 73 सीटें ले जाने वाले लाला जी ने यूपी को क्या दिया? अब देश में तालियां नहीं मिलतीं तो ताली बजवाने विदेश चला जाता है। ऐसा तालीबाज आज तक नहीं देखा। वहीं मुलायम सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अपने परिवार के 12 लोगों को साथ लेकर मुलायम सिंह यादव समाजवाद को आगे बढ़ा रहे हैं।

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