यूपी में ‘ऑपरेशन क्लीन’ जारी, योगी सरकार में अब तक मारे गए 124 दुर्दांत अपराधी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार में अपराधियों में यूपी पुलिस का खौफ देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन क्लीन जारी है।यूपी पुलिस के लिए योगी सरकार के साढ़े तीन साल किसी एनकाउंटर के लिहाज से किसी ट्रीट से कम नहीं रहे। योगी सरकार में प्रदेश के 124 दुर्दांत अपराधियों को मौत के घाट उतार दिया गया।

यूपी पुलिस ने योगी सरकार के कार्यकाल में बीते साढ़े तीन साल में पुलिस मुठभेड़ में 124 अपराधी मारे गए। ढेर होने वालों में 47 अल्पसंख्यक, 11 ब्राह्मण, 8 यादव , जबकि अन्य 58 में ठाकुर ,बैश्य, पिछड़े और एससी एसटी जाति के बदमाश शामिल इनमें 47 अल्पसंख्यक, 11 ब्राह्मण और 8 यादव थे। वहीं, शेष 58 अपराधियों में ठाकुर, वैश्य, पिछड़े, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बदमाश शामिल थे। अल्पसंख्यक समुदाय के ज्यादातर अपराधी पश्चिमी यूपी के थे।

बता दें, कि यूपी पुलिस ने योगी सरकार के कार्यकाल में अब तक 6,126 एनकाउंटर कर दिए हैं। इन एनकाउंटर्स में प्रदेश में १२४ दुर्दांत अपराधियों को मौत के घाट उतार दिया गया, जबकि 2293 बदमाश जख्मी होने के बाद पुलिस की पकड़ में आए। हालांकि इस कोशिश में 13 पुलिसकर्मी शहीद भी हुए हैं। इनमें से 8 पुलिसकर्मी सिर्फ बिकरू हत्याकांड में ही अपनी जान गंवा बैठे।

योगी राज में सबसे ज्यादा एनकाउंटर मेरठ और आगरा में हुए। यहां इनमें से 1159 गोली लगने से घायल हुए, जबकि १४ को पुलिस ने मौके पर ही मार गिराया। दूसरे नंबर पर इसके बाद आगरा में 1422 एनकाउंटर्स किए गए. इस दौरान 3693 अपराधी गिरफ्तार हुए, जबकि 134 गोली लगने से घायल हुए। पुलिस ने आगरा में 11 अपराधियों को ढेर कर दिया। इसके बाद मुजफ्फरनगर रहा, जहां 11 अपराधी मारे गए। सहारनपुर में 9, आजमगढ़ में 7 और शामली में 5 अपराधी पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए।

राकेश पांडेय के एनकाउंटर के बाद सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस जाति विशेष के लोगों का ही एनकाउंटर कर रही है और फर्जी आंकड़े दिए जा रहे हैं। इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि 31 मार्च 2017 से लेकर 9 अगस्त 2020 तक हुए पुलिस एनकाउंटर में ब्राह्मण जाति के 11 अपराधी मुठभेड़ में मारे गए।

आरोप के बाद डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने पुलिस पर विशेष वर्ग के लोगों के एनकाउंटर किए जाने के आरोप पर कहा कि इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं। अपराधियों की कोई जाति और धर्म नहीं होता है। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सभी लोग आपराधी है। इनका वर्ग जाता से कोई मतलब नही है। पुलिस एक जाती वर्ग के लोगों को देख कर नही एनकाउंटर नही किया जा रहा है ये बातें बेबुनियाद हैं।

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