यूपी में सिपाही भर्ती पर अड़ंगा, हाईकोर्ट का नोटिस

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इलाहाबाद। यूपी में सिपाही भर्ती पर अड़ंगा लग गया है। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगते हुए पूछा है कि यूपी में सिपाही भर्ती के नियम आखिर क्यों बदले गये। प्रदेश सरकार ने इस बार पुलिस भर्ती मेरिट के आधार पर कराने की तैयारी की थी लेकिन बिना परीक्षा कराए पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती अब कोर्ट के फैसले के अधीन आ गयी है। अब सरकार को चार हफ्ते में नियम बदलने के कारण बताने हैं।

इस सम्बन्ध में दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदेश सरकार से चार सप्ताह के अंदर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से इसकी जरूरत पर भी सवाल किया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि पहले से चली आ रही भर्ती प्रक्रिया में संशोधन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

यूपी में सिपाही भर्ती

यूपी में सिपाही भर्ती पर महाधिवक्ता को नोटिस

मामले की गंभीरता पूर्वक लेते हुए हाइकोर्ट ने महाधिवक्ता को  नोटिस जारी करते हुए सरकार का अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका दाखिल करते हुए रणविजय सिंह ने कहा है कि पुलिस विभाग में सिपाही का पद बहुत ही महत्वपूर्ण है, यूपी में सिपाही भर्ती मे लापरवाही प्रदेश के सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। यूपी में कांस्टेबल भर्ती के लिए अभ्यर्थी की योग्यता का विधिवत परीक्षण कर चयन करना आवश्यक है। पुलिस भर्ती के लिए पूर्व में हो रही लिखित परीक्षा, रीजनिंग टेस्ट, मानसिक योग्यता और शारीरिक दक्षता, साक्षात्कार आदि को उचित ठहराते हुए पूछा गया है कि इसे क्यों बंद किया जा रहा है।

संशोधन कर सरकार ने बनाया था नया नियम

सूबे के मुखिया अखिलेश यादव ने  पिछले वर्ष  पुराने नियम को संशोधित करते हुए नया नियम बनाया था। नए नियम के तहत सिपाहियों की भर्ती  हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्राप्तांक के आधार पर होगी। इसके बाद शारीरिक परीक्षा में साढ़े चार किलोमीटर दौड़ को शामिल किया गया है।   दाखिल याचिका में संशोधित नियमावली को रद्द करने की मांग की गई है। पुलिस भर्ती मामले में संशोदन को रद्द करने के लिए दाखिल मांमले पर गंभीरता पूर्वक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फिर सुनवाई के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

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