यूपी विधानसभा चुनाव की कमान कल्याण-स्मृति को

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रामकृष्ण वाजपेयी/लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव की कमान भाजपा के पुरोधा और तीन बार मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह को सौंपी जाएगी। वह जल्द ही राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर प्रदेश की सियासी पतवार सम्हाल लेंगे। इसी के साथ स्मृति ईरानी यूपी में पार्टी का चेहरा होंगी और चुनाव अभियान को धार देना उनकी जिम्मेदारी होगी। पार्टी की एक बैठक में इस फैसले पर मोहर लग चुकी है। हालांकि पार्टी की तरफ से इस बात के स्पष्ट संकेत नहीं दिये गये कि जीतने पर मुख्यमंत्री कौन बनेगा।

यूपी विधानसभा चुनाव

बाजपेयी की जगह लेंगे स्वतंत्र देव

दिल्ली में हुई इस बैठक में एक और बड़ा फैसला किया गया कि लक्ष्मी कांत वाजपेयी की जगह जल्द ही स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया जाएगा। इस बैठक में वरुण गांधी के नाम पर कोई चर्चा नहीं हुई। कुछ दिन पूर्व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और वरुण गांधी की मुलाकात के बाद इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि वरुण गांधी को प्रदेश में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

यूपी विधानसभा चुनाव सबको साधने की मुहिम

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कल्याण सिंह और स्मृति ईरानी पर फैसला करने के बाद हाई कमान ने यूपी के लिए अपनी मंशा साफ कर दी है। कल्याण सिंह पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में से है और राममंदिर आन्दोलन की कमान सम्हाल चुके हैं। दूसरी तरफ स्मृति एक तेजतर्रार युवा चेहरा हैं जिन्हें मोदी का करीबी भी माना जाता है और राहुल गांधी का दुश्मन नम्बर एक। कल्याण सिंह के जरिये पार्टी आंतरिक अनुशासन मजबूत करना चाहती है साथ ही रुठे हुए और उपेक्षित नेताओं को मुख्यधारा में लाना चाहती है। पार्टी की अंदरुनी गुटबाजी और मतभेदों को सुलझाने की जिम्मेदारी भी कल्याण सिंह उठाएंगे।

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सोशल मीडिया पर भी छाने की तैयारी

बीजेपी को लगता है कि उसके इस फैसले से पार्टी और संघ के बीच दूरियां कम होंगी। जिसका फायदा चुनाव में उसे मिल सकता है। चुनाव अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी ने एक और रणनीति बनायी है। पार्टी जल्द ही सोशल मीडिया के जरिये भी अपने वोटरो तक पहुंचने के लिए फेसबुक ट्विटर और वाट्सएप पर अभियान शुरू करने वाली है।

2014 का करिश्मा दोहराने की रणनीति

अगले साल 2017 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं। भारतीय जनता पार्टी इस बार अपन हाथ से यह मौका जाने नहीं देना चाहती। पार्टी को लगता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव का करिश्मा वह 2017 में भी दोहरा सकती है। सात सीटों को छोड़ दें तो 2014 के चुनाव में पार्टी ने सभी लोकसभा सीटें जीती थीं। हालांकि दो सीटें सहयोगी अपना दल के खाते की हैं।

 

 

 

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