यूरिन रोकने की आदत है तो सावधान हो जाइये, इससे आपकी जान भी जा सकती है

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नई दिल्ली। अगर आपको भी यूरिन रोकने की आदत हैं तो हो जाएं सावधान, क्योंकि ये आदत आपकी जान भी ले सकती है। यूरिन रिलीज करना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। जैसे ही आपको महसूस हो वैसे ही आपको एक से दो मिनट के अंदर इसे रिलीज़ कर देना चाहिए नहीं तो इससे आपकी किडनी पर बुरा असर पड़ता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको इन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

पेशाब में जलन 

सामान्यतया हर एक मिनट में 1-2 एमएल यूरिन ब्लैडर में पहुंचता है। ब्लैडर को संकेत मिलने के बाद जल्द ही खाली कर देना चाहिए वरना ब्लैडर पर जोर पड़ने से किडनी पर भी दबाव पड़ता है। पेशाब में यूरिया व अमीनो एसिड जैसे टॉक्सिक तत्त्व होते हैं। यूरिन को रोकने से किडनी को नुकसान होने के साथ ब्लैडर में दर्द और संक्रमण हो सकता है।

किडनी फेलियर

किडनी फेलियर एक मेडिकल समस्‍या है जो किडनी के अचानक ब्‍लड से विषाक्‍त पदार्थों और अवशेषों के फिल्‍टर करने में असमर्थ होने के कारण होती है। यूरीन से संबंधित हर तरह के इंफेक्शन किडनी पर बुरा असर डालते हैं। बॉडी में यूरिया और क्रियटिनीन दोनों तत्व ज्यादा बढ़ने की वजह से यूरीन के साथ बॉडी से बाहर नहीं निकल पाते हैं, जिसके कारण ब्लड की मात्रा बढ़ने लगती है। भूख कम लगना, मितली व उल्टी आना, कमजोरी लगना, थकान होना सामान्य से कम पेशाब आना, ऊतकों में तरल पदार्थ रुकने से सूजन आना आदि इसके लक्षण है।

किडनी में स्‍टोन

यूूरिन को एक से दो घंटे रोकने के कारण महिलाओं व कामकाजी युवाओं में यूूरिन संबंधी दिक्कतें आती है। जिसमें शुरूआत ब्लेडर में दर्द होता है। साथ ही 8 से 10 घंटे बैठ कर काम करने वाले युवाओं को यूूरिन की जरूरत ही तब महसूस होती हैं, जबकि वह कार्य करने की स्थिति बदलते हैं। जबकि इस दौरान किडनी से यूरिनरी ब्लेडर में पेशाब इकठ्ठा होता रहता है। हर एक मिनट में दो एमएल यूूरिन ब्लेडर में पहुंचता है, जिसे प्रति एक से दो घंटे के बीच खाली कर देना चाहिए। ब्लेडर खाली करने में तीन से चार मिनट की देरी में पेशाब दोबारा किडनी में वापस जाने लगता है, इस स्थिति के बार-बार होने से पथरी की शुरूआत हो जाती है। क्योंकि पेशाब में यूरिया और अमिनो एसिड जैसे टॉक्सिक तत्व होते हैं।

यूरीन का रंग बंदलना

बहुत अधिक देर यूरीन को रोकने से यूरीन का रंग भी बदलने लगता है। हालांकि ऐसा होने के पीछे सबसे अधिक संभावना संक्रमण की होती है। इसके अलावा बीट, बेरीज, जामुन, शतवारी जैसे कुछ खाद्य पदार्थ के कारण भी यूरीन का रंग प्रभावित होता है। विटामिन बी यूरीन के रंग को हरे और शलजम लाल रंग में बदल देता है।

 

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