ये पांच गद्दार न होते तो आज भी सोने की चिड़िया होता भारत

सोने की चिड़ियाएक समय ऐसा था जब भारत देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। लेकिन ये सब अंग्रेजो के आने से पहले था। अब सोने की चिड़िया सिर्फ एक नाम रह गया है।

दरअसल हमारे देश को यूं ही सोने की चिड़िया नहीं कहते थे। हमारी उत्पत्ति से अंग्रेजों के समय तक हम वाकई सोने की चिड़िया से कम नहीं थे।

भारत देश में सोने की कमी नहीं थी, लेकिन ये बीते समय की बात है। अब ऐसा कुछ नहीं है और इन सब की वजह है युद्ध। भारत देश पर विदेशियों ने कई बार आक्रमण किया। इस वजह से भारत कई बार लूटा गया।

आज हम आपको भारत के गद्दार के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने देश के साथ गद्दारी नहीं की होती तो हम आज भी सोने की चिड़िया ही होते-

भारत के गद्दार –

जयचंद- पृथ्वीराज चौहान देश के महान राजाओं में से हैं। उनके शासनकाल में मौहम्मद गौरी ने कई बार आक्रमण किए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। वहीं कन्नौज के राजा जयचंद पृथ्वीराज से अपनी बेइज्जती का बदला लेना चाहते थे इसलिए उन्होंने मोहम्मद गौरी से हाथ मिलाकर उसे लड़ाई में मदद की। इसका परिणाम यह हुआ कि 1192 के तराईन की लड़ाई में मोहम्मद गौरी की जीत हुई।

मान सिंह- महाराणा प्रताप ने कभी मुगलों की गुलामी स्वीकार नहीं कि लेकिन मान सिंह जैसे गद्दार ने पद की खातिर खुद को मुगलों के हाथों बेच दिया।

मीर जाफर- मीर जाफर न होता तो शायद ही हम अंग्रेजों के गुलाब बन पाते। 1757 के प्लासी युद्ध में सिराजुद्दौला को हराने के लिए मीर जाफर ने अंग्रेजों की मदद ली।

मीर कासिम- अंग्रेजों ने सिराजुद्दौला को हटाने के लिए मीर जाफर का इस्तेमाल किया और मीर जाफर हो हटाने के लिए मीर कासिम का। कासिम को गद्दी मिली तो लेकिन उन्हें अहसास हो गया था कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी है लेकिन तब तक उन्होंने सब कुछ गवा दिया था।

मीर सादिक- जब कोई अपना ही दुश्मन से मिल जाए तो हार निश्चित होती है। भारत के महान योद्धा टीपू सुलतान के साथ भी यही हुआ।

उनका अपना खास मंत्री मीर सादिक ही अंग्रेजों से जा मिला। नतीजा यह हुआ कि 1779 के युद्ध में अग्रेजों ने उसे हरा दिया।

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