उत्तराखंड का अजय सिंह बन गया गोरखपुर का योगी, जानिये कैसे तय किया योगी आदित्यनाथ ने ये सफ़र

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योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का 21वां मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया है। आदित्यनाथ के नाम पर मोहर लगते ही उन सभी कयासों पर पूर्ण विराम लग गया है, जो मुख्यमंत्री के चयन के पहले लगाए जा रहे थे। बहरहाल, अब प्रदेश की कमान एक ऐसे हाथ में सौंप दी गई है जो कट्टर हिंदूवादी के रूप में जाना जाता है। आइये हम आपको योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक सफ़र से रूबरू कराते हैं।

योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक करियर पर एक नजर

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की गोरखपुर से सांसद है। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होंने लगातार सातवीं बार जीत दर्ज की। योगी आदित्यनाथ बीएससी पास हैं। वे 26 साल की उम्र से ही सांसद हैं।  उनकी इस चमत्कारी जीत के पीछे उनका कट्टर हिंदुत्व का एजेंडा हैं। इसी एजेंडे की वजह से उनकी ताकत लगातार बढ़ती गई।

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इतनी कि आखिरकार गोरखपुर में जो योगी कहे वही नियम है, वही कानून है। तभी तो उनके समर्थक नारा भी लगाते हैं,’गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना है।

1998 में शुरू हुई राजनीतिक पारी योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह है। वह मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। गढ़वाल यूनिवर्सिटी से उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की। गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें दीक्षा देकर योगी बनाया था। अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

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गोरखपुर से ही आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई है। 1998 में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ संसद पहुंचे तो वह सबसे कमउम्र के सांसद थे। राजनीति के मैदान में आते ही योगी आदित्यनाथ ने सियासत की दूसरी डगर भी पकड़ ली उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी कट्टर हिंदुत्व की राह पर चलते हुए उन्होंने कई बार विवादित बयान दिए।

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योगी भले ही विवादों में बने रहे लेकिन उनकी ताकत लगातार बढ़ती गई। 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया। गिरफ्तारी हुई और इस पर कोहराम भी मचा। योगी के खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए।

अब तक आदित्यनाथ की हैसियत ऐसी बन गई थी कि जहां वो खड़े होते, वहाँ सभा शुरू हो जाती। वो जो बोल देते, उनके समर्थकों के लिए वो कानून हो जाता। यही नहीं, होली और दीपावली जैसे त्योहार कब मनाया जाए, इसके लिए भी योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर से फरमान जारी करते हैं इसलिए गोरखपुर में हिन्दूओं के त्योहार एक दिन बाद मनाए जाते हैं।

आदित्यनाथ के तौर-तरीकों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गोरखपुर के कई ऐतिहासिक मुहल्लों के नाम बदलवा दिए। इसके तहत उर्दू बाजार हिंदी बाजार बन गया। अलीनगर आर्यनगर हो गया। मियां बाजार माया बाजार हो गया।

इतना ही नहीं, योगी आदित्यनाथ तो आजमगढ़ का नाम भी बदलवाना चाहते हैं। इसके पीछे आदित्यनाथ का तर्क है कि देश की पहचान हिंदी से है उर्दू से नहीं, आर्य से है अली से नहीं। गोरखपुर और आसपास के इलाके में आदित्यनाथ और उनकी हिंदू युवा वाहिनी की तूती बोलती है।

 

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