आश्रम की आढ़ में करते थे बच्चियों का यौन शोषण, छह को बनाया हवस का शिकार

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भोपाल: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक गैर सरकारी संगठन द्वारा नाबालिग बच्चियों के लिए चलाए जा रहे माधव बाल आश्रम में यौन शोषण और दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने आश्रम की संचालिका को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि संचालिका का पिता फरार है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, शहर के पटेल नगर में शंकुतला परमार्थ समिति के माध्यम से संचालित बाल आश्रम की लड़कियों ने उनके यौन उत्पीड़न की शिकायत जिलाधिकारी से लिखित में की थी, जिसके आधार पर महिला बाल विकास विभाग की टीम ने जांच की।

यौन शोषण

यौन शोषण का शिकार हो रही थी माधव बाल आश्रम में रहने वाली बच्चियां 

सूत्रों के अनुसार, बालिकाओं ने जांच के दौरान बताया कि उनके साथ संचालिका शैला अग्रवाल के सेवानिवृत्त शिक्षक पिता के.एन. अग्रवाल अनैतिक कार्य करते हैं और जब लड़कियां इसकी शिकायत शैला अग्रवाल से करती हैं तो वह उनकी पिटाई करती है। महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक सुरेश तोमर के साथ दो काउंसलर को बालिकाओं ने बताया कि उन्हें नशीली दवाएं दी जाती हैं और उनका यौन शोषण किया जाता है। 11 से 18 वर्ष की इन बालिकाओं ने आश्रम में व्याप्त अन्य गड़बड़ियों के बारे में भी जांच दल को बताया।

महिला बाल विकास के संयुक्त संचालक तोमर ने बताया कि जांच में बालिकाओं द्वारा किए गए खुलासे के आधार पर बाल संरक्षण अधिकारी सरिता शुक्ला ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने शैला अग्रवाल और उनके पिता के.एन. अग्रवाल पर पास्को सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

कोतवाली प्रभारी संजय मिश्रा ने शुक्रवार को बताया कि संचालिका और उनके पिता पर मामला दर्ज किया गया है। संचालिका शैला अग्रवाल को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके पिता को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।

मिश्रा के मुताबिक, इस आश्रम में 23 बालिकाएं रहती हैं, जिनमें से छह ने उनके साथ दुष्कर्म किए जाने की बात कही हैं। सभी बालिकाओं को वैकल्पिक व्यवस्था होने तक अस्थाई रूप से सरकारी छात्रावास में भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक यूसुफ करैशी के अनुसार, महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक और दो काउंसलर ने काउंसलिंग की तो छह बालिकाओं ने दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि की। आश्रम को सील कर दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, आश्रम से पिछले दिनों दो बालिकाएं भागी थीं और उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि आश्रम में संचालिका के पिता उनके साथ यौन शोषण करते हैं, पर पुलिस ने आरोपों पर ध्यान नहीं दिया था। इसके बाद एक बालिका ने लिखित में जिलाधिकारी से शिकायत की, जिस पर प्रशासन ने मामले की जांच की और लड़कियों ने काउंसलिंग के दौरान यौन शोषण की पुष्टि की।

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