#Raees मूवी रिव्यू : आ गया हूं अपनी डेयरिंग और दिमाग लेकर ‘रईस’ बनने

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फिल्म: रईस
डायरेक्टर: राहुल ढोलकिया
स्टार कास्ट: शाहरुख खान, माहिरा खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी,  अतुल कुलकर्णी, आर्यन बब्बर
रेटिंग: 3.5

'रईस'

‘रईस’ का फिल्म रिव्यू

मुंबई। आखिरकार आज ‘रईस’ रिलीज़ हो ही गई। शाहरुख खान के फैंस उनकी इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जब से फिल्म के ट्रेलर और गाने रिलीज़ हुए हैं तभी से फिल्म को लेकर दिलचस्पी बढ़ती ही जा रही थी। फिल्म में शाहरुख एक अलग अंदाज़ में नज़र आएंगे। किंग ऑफ रोमांस कहे जाने वाले शाहरुख इस बार बाहें फैलाए नहीं बल्कि दूसरों की बाहें तोड़ते हुए नज़र आएंगे। अब इस नए अवतार में शाहरुख कितने सफल हुए हैं आइये फिल्म की समीक्षा करते हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी 80 के दशक पर बेस्ड है। कहानी गुजरात के इर्द गिर्द घूमती है, जहां स्कूल जाने वाला रईस (शाहरुख खान) और कबाड़ का काम करने वाली उसकी मां (शीबा चड्ढा) बहुत गरीबी से अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। लेकिन रईस को ऐसी जिंदगी मंजूर नहीं, वो हमेशा ही कुछ बड़ा करना चाहता है। इसलिए वो देसी शराब बेचने लगता है लेकिन रेड पड़ने की वजह से काम में अड़चन आ जाती है। फिर रईस अंग्रेजी शराब की दुकान पर (अतुल कुलकर्णी) वर्कर के तौर पर काम करने लगता है। दिमाग का तेज रईस एक वक्त के बाद खुद का धंधा शुरू करना चाहता है लेकिन उसके लिए उसे पैसों की जरूरत होती है जिसके लिए वो अपने गुरु के पास जाता है लेकिन उसका गुरु शर्त रखता है जिसके लिए रईस को 3 दिन का टाइम दिया जाता है।

रईस इस शर्त को पूरा करने के लिए मूसा भाई के पास जाता है। मूसा भाई, रईस की स्टाइल से इम्प्रेस हो जाता है और उसकी हेल्प भी करता है। फिर कहानी में कई मोड़ आते हैं, वापसी पर रईस खुद का शराब का धंधा शुरू कर देता है। खुद का धंधा खोलने के बाद रईस के पीछे वहां का एसपी मजूमदार (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) पड़ जाता है जो काफी कड़क पुलिसवाला है, लेकिन रईस का धंधा रोक पाने की हजार कोशिशें करने के बावजूद मजूमदार उसे पकड़ नहीं पाता है, फिर कहानी में ढ़ेर सारे ट्विस्ट एंड टर्न्स आते हैं, जिसके लिए आपके सिनेमाघर का रुख करना पड़ेगा।

डायरेक्शन

‘लम्हा’ और ‘मुम्बई कटिंग’ जैसी फिल्मों के डायरेक्टर राहुल ढोलकिया ने 80 के दशक को बखूबी दिखाया है। फिल्म के लोकेशंस, सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड आपको 80 के दशक का पूरा फील देगी। फिल्म के डायलॉग्स भी काफी दमदार हैं। लेकिन फिल्म की कहानी इंटरवल के बाद काफी खींची-खींची हुई नजर आती है, जिसके ऊपर काफी काम किया जा सकता था। माहिरा खान को अच्छा मौका मिला था लेकिन वो इस मौके का भरपूर फायदा नहीं उठा पाईं। फिल्म के सेकंड हाफ को और इंटरेस्टिंग बनाया जा सकता था।

एक्टिंग

शाहरुख खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की एक्टिंग ही फिल्म की जान है। शाहरुख ने पूरी फिल्म की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई हुई है। शाहरुख के बाद ये काम नवाजुद्दीन ने पूरा किया। माहिरा खान फिल्म के लिए मिस कास्टिंग के तौर पर नज़र आईं। माहिरा खान पूरी तरह से एक्सप्रेशनलेस थीं और रोमांस का एंगल जीरो था। इसकी वजह से कई सांग और सीक्वेंस में वो मज़ा नहीं आया। हालांकि सनी लियोनी ने अपने एक गाने से फिल्म में जान डाल दी। बाकी एक्टर्स ने भी अच्छा काम किया है।

म्यूजिक

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है लेकिन गानो में सिर्फ ‘लैला मैं लैला’ ही कहानी के साथ सटीक बैठता है। बाकी जालिमा, उड़ी- उड़ी जैसे गाने भी अच्छे हैं।

देखें या नहीं 

शाहरुख खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी के फैन हैं तो एक साथ दोनों की एक्टिंग एंज्वॉय करने का इससे अच्छा मौका आपको नहीं मिलेगा। एक बार जरूर देखें रईस। 

 

 

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