रक्षा मंत्री के खत से रावत सरकार हरकत में

देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2010 से सैनिक कल्याण निदेशक की तैनाती नहीं करने पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की आपत्ति के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गयी है। रक्षा मंत्री ने दिसंबर में सीएम हरीश रावत को सैनिक कल्याण के कामों की हो रही अनदेखी को लेकर पत्र लिखा था। ऐसे में सरकार ने निदेशक की तैनाती के लिए नियमावली बदल कर उसकी तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रक्षा मंत्रालय प्रदेश में सैनिक कल्याण और पुनर्वास विभाग पर कड़ी नजर रखे हुए है। निदेशक की तैनाती के साथ जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों के वेतन को केंद्रीय सैनिक बोर्ड के निर्धारित मानकों के अनुरूप देने की बात रक्षा मंत्रालय ने कही थी। रक्षा मंत्रालय द्वारा कई मामलों में हो रही मनमानी पर हस्तक्षेप किया गया। जिसके बाद कांग्रेस सरकार ने 16 जनवरी को निदेशक की तैनाती के लिए वर्ष 2008 से चली आ रही चयन नियमावली ही बदल दी है, जिससे प्रदेश रकार के अनुरूप नियुक्ति हो सके। सैनिक कल्याण निदेशक की नियुक्ति के लिए सरकार ने एक बार फिर प्रक्रिया शुरू की है।

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रक्षा मंत्री ने जवाब मांगने के साथ चेतावनी भी दी 

निदेशक की नियुक्ति के अलावा रक्षा मंत्रालय के केंद्रीय सैनिक बोर्ड ने राज्य सैनिक बोर्ड के अध्यक्ष पद पर लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी की तैनाती पर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाते हुए राज्य सरकार से जबाव तलब किया है। केंद्र ने बोर्ड का अध्यक्ष सीएम की जगह रिटायर्ड जनरल को बनाये जाने को नियम विरूद्ध करार दिया है और केंद्र से मिलने वाली वार्षिक फंडिंग रोकने की चेतावनी भी दी है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र की आपत्ति को लेकर शासन स्तर से गई फाइल सीएम कार्यालय में ही अटकी हुई है।

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खंडूडी ने उठाये गंभीर सवाल

सैनिक कल्याण विभाग में निदेशक और जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति पर सांसद भुवन चंद्र खंडूड़ी ने भी कई सवाल खड़े किये हैं। खंडूड़ी सरकार ने वर्ष 2008 में जो नियुक्ति नियमावली बनाई थी उसे मौजूदा सरकार ने खारिज कर दिया है। जनरल खंडूडी ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाये हैं कि इस पद पर सरकार अपने चहेते की नियुक्ति करना चाहती है इसीलिए इस प्रक्रिया को शिथिल किया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि उत्तराखंड एक सैनिक बाहुल्य राज्य है, जहां योग्य व्यक्ति को ही सैनिक कल्याण निदेशक बनाने के लिए हमने ऐसी नियमावली बनायी थी। लेकिन रावत सरकार सैन्य हितों में भी मनमानी कर रही है।

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