बिना किसी की मदद के गांव वाले चला रहे हैं स्कूल, बनी मिसाल

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देहरादून। उत्तराखंड के जौनसार-बावर परगने के बिजऊ के लोग इन दिनों सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। गांव के लोगों ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय को चलाने का जिम्मा उठा लिया है। साथ ही जर्जर इमारत को भी सही करवाया है। पूरे प्रदेश के लिए ये गांव वाले मिसाल बन गए हैं।  

राजकीय प्राथमिक विद्यालय

राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन का कराया मरम्मत

जौनसार-बावर परगने के बिजऊ स्थित इस राजकीय प्राथमिक विद्यालय में सुरक्षा दीवार के निर्माण पर तीन लाख रुपये, भवन की मरम्मत पर एक लाख रुपये और अन्य निर्माण कार्यों पर 30 हजार रुपये का खर्चा आया। इसे ग्रामीणों व शिक्षकों ने मिलजुलकर उठाया। इतना ही नहीं, विद्यालय में नौनिहालों की सुविधा के लिए आधुनिक शौचालय व स्नानागार भी बनाया गया है। इन्हीं सुविधाओं की बदौलत विद्यालय को दो बार जिला स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार भी मिल चुका है।

जागरूक समाज की सहभागिता से सरकारी विद्यालयों की तस्वीर कैसे बदली जा सकती है, इसका नायाब उदाहरण यह विद्यालय है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक संदीप रावत ने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत मरम्मत के लिए जब बजट नहीं मिला तो उन्होंने ग्राम प्रधान कलीराम के साथ नौनिहालों को होने वाली समस्या पर चर्चा की।

प्रधान ने पंचायत की खुली बैठक में विद्यालय भवन निर्माण का मसला उठाया तो ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर भवन की मरम्मत पर सहमति जताई। ग्रामीणों की जागरुकता देख विद्यालय के शिक्षक सोमनाथ ने भी आर्थिक सहायता मुहैया कराई। बताया कि भवन की मरम्मत, सुरक्षा दीवार का निर्माण व प्रांगण को पक्का करने समेत अन्य कार्यों पर 3.30 लाख की लागत आई।

यह राशि ग्रामीणों व शिक्षकों के सहयोग से ही जुटाई गई। ग्राम प्रधान कलीराम ने कहा कि ग्रामीण नौनिहालों के सुखद भविष्य के लिए ग्रामीण शिक्षकों के साथ मिलकर भविष्य में भी हरसंभव सहयोग करेंगे।

शिक्षकों ने स्वयं के संसाधनों से विद्यालय के पुस्तकालय के लिए भी बाल साहित्य मुहैया कराया है। प्रधानाध्यापक संदीप कुमार ने बताया कि समाज के सहयोग से विद्यालय की दशा एवं दिशा बदली जा रही है। इससे विद्यालय में गुणवत्तापरक शैक्षणिक माहौल बनाने में मदद मिलेगी। बता दें कि ये गांव देश भर के लिए मिसाल बन गया है।

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